मुस्लिम महिलाओं ने पर्सनल लॉ बोर्ड को लगाई फटकार, कहा- केवल एक NGO मात्र है AIMPLB

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Updated on 13 Oct, 2016 at 6:10 pm

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भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह-संस्थापक और सुप्रीम कोर्ट की याचिकाकर्ता जाकिया सोमन ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) को आड़े हाथों लिया है।

जाकिया सोमन ने कहा है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड है क्या? यह लाखों की तादाद में मौजूद एक NGO की तरह ही है।


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गौरतलब है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मोदी सरकार द्वारा यूनिफार्म सिविल कोड को अमल में लाने के खिलाफ है।

मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने  ‘तीन तलाक’ पर सरकार के रुख का समर्थन किया था कि तीन तलाक महिलाओं के समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है और यह प्रथा समाप्त होनी चाहिए। 16 महिला कार्यकर्ताओं ने एक संयुक्त बयान  पर हस्ताक्षर कर कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट में सरकार के रुख का तह-ए-दिल से स्वागत करते हैं।’

वहीं, बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने ‘ट्रिपल तलाक’ पर सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार यूनिफार्म सिविल कोड लाकर देश को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

महिला कार्यकर्तायो ने अपने संयुक्त बयान में कहा है:

“हम (सरकारी) हलफनामे के स्पष्ट बयान का स्वागत करते हैं कि तीन तलाक, निकाह, हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाएं महिलाओं की समानता और गरिमा का उल्लंघन करती हैं और इसलिए इन्हें समाप्त किया जाना जरूरी है।”

आगे बयान में कहा गया कि तीन तलाक कुरान की हिदायतों और भारतीय संविधान में निहित न्याय और समानता के मूल्यों का उल्लंघन है। बयान पर हस्ताक्षर करने वाली 16 महिलाओं में  जाकिया सोमन भी शामिल हैं।

 


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