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युवराज सिंह का आशीष नेहरा के नाम भावुक संदेश, पुरानी यादें साझा की

Published on 3 November, 2017 at 2:59 pm By

आशीष नेहरा भारतीय टीम का ऐसा सितारा रहा है जिसने टीम इंडिया की कई जीत में अपना विशेष योगदान दिया। कई कप्तान आए और गए। हालांकि, नेहरा एक खिलाड़ी के तौर पर एक दशक से अधिक समय तक टीम इंडिया में अपनी सेवाएं देते रहे। उनकी परफॉरमेन्स गजब की रही। ठीक किसी योद्धा की तरह।


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आशीष नेहरा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने होमग्राउंड दिल्ली के फिरोज शाह कोटला स्टेडियम में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया है।

18 साल के अपने लंबे करियर के दौरान नेहरा ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने देश के लोगों और साथी खिलाड़ियों के बीच अपनी ऐसी छाप छोड़ी है, जिसका सभी सम्मान करते हैं।

इसका नजारा उनके आखिरी मैच में भी देखने को मिला। मैच का आखिरी ओवर उन्होंने फेंका। हर गेंद पर वहां बैठे दर्शकों ने उनकी हौसला अफजाई की। लोग नेहरा जी – नेहरा जी कह रहे थे। लोग उनके पोस्टर्स हाथों में लिए थे।

लोगों के इस असीम प्यार का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने पूरे मैदान का चक्कर लगाया। वाकई यह पल हर खेल प्रेमी के लिए भावपूर्ण रहा।

टीम इंडिया के सिक्सर किंग युवराज सिंह भी काफी इमोशनल हो गए। उन्होंने अपने फेसबुक पर नेहरा के नाम भावुक संदेश लिखा है।

युवी और नेहरा की दोस्ती काफी अच्छी रही है। युवी ने 38 वर्षीय इस क्रिकेटर की तारीफ में अपने फेसबुक अकाउंट पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा।

‘Resilience of Mr Ashish Nehra’ टाइटल से लिखी गई पोस्‍ट में युवी ने नेहरा से जुड़े कुछ ऐसे किस्सों का जिक्र किया है, जिनके बारे में शायद ही क्रिकेट फैन्स जानते हों। युवराज ने लिखाः

“आशीष नेहरा- अपने दोस्त के बारे में पहली चीज जो मैं कहना चाहता हूं कि वो है उनकी ईमानदारी। वो दिल का बहुत साफ है। शायद कोई धार्मिक किताब ही उनसे ज़्यादा ईमानदार होगी। मैं जानता हूं कि कई लोग इसे पढ़कर हैरान हो जाएंगे। कई बार ऐसा होता है कि हम किसी इंसान और उसकी जिंदगी को लेकर जजमेंटल हो जाते हैं। ऐसा अक्सर मशहूर हस्तियों के साथ होता है। आशू कई लोगों के साथ बहुत ईमानदार थे, जिस कारण उन्हें इसका खामियाजा भी उठाना पड़ा। लेकिन मेरे लिए वो हमेशा आशू और नेहरा जी रहे। वो दिल के बहुत साफ इंसान हैं, ईमानदार के साथ-साथ मजेदार भी, जो हमेशा अपनी टीम की उम्मीदों पर खरा उतरा।

मैं नेहरा से पहली बार उस समय मिला जब हम अंडर-19 के लिए खेलते थे, उस समय नेहरा का चयन टीम इंडिया के लिए हो गया था। वो हरभजन के साथ रूम शेयर कर रहे थे। मैं भज्जी से मिलने उनके कमरे में गया तो वहां देखा कि एक लंबा, दुबला-पतला लड़का है, जो बिना हिले खड़ा नहीं रह पा रहा था। वह एक ऐसी बिल्ली की तरह थे जिसे बहुत गर्म छत के नीचे छोड़ दिया गया हो। वह कुछ देर शांत बैठेगा और फिर अचानक स्ट्रेचिंग या फिर अपना मुंह मरोड़ने लगेगा या आंखे घुमाने लगेगा। नेहरा को पहली बार देखकर मुझे बहुत हंसी आई और जैसे लगा कि किसी ने उनकी पैंट में चीटियां छोड़ दी हैं, लेकिन जब मैं टीम इंडिया के लिए खेला तो लगा कि आशू ऐसे ही हैं। कुछ लोग स्थिर खड़े नहीं सकते हैं। जहां तक चीटियों की बात है, वो उनकी कड़ी मेहनत का हिस्सा हैं जिसके बारे में मैं बाद में बताउंगा।


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सौरव गांगुली ने आशू को पोपट नाम दिया था, क्योंकि वो बहुत बोलता था। यहां तक कि मेरे हिसाब से वह पानी के अंदर भी बातें कर सकता है।वह बुहत मजाकिया भी है। मेरे सामने तो उन्हें कुछ बोलने की भी ज़रूरत नहीं, उनकी बॉडी लैंगवेज ही इतनी फनी है। अगर आप आशीष नेहरा के साथ हों, तो आपका दिन ख़राब नहीं जा सकता। वो बंदा आपको हंसा-हंसाकर गिरा देगा।

मैंने ये बात आशू से कभी नहीं कही कि मुझे उनसे ही प्रेरणा मिली। मैंने देखा कि अगर आशू 38 की उम्र में कई इंज्युरी और सर्जरी के बाद भी बॉलिंग कर सकता है तो मैं भी 36 की उम्र में ये सब कर सकता हूं। सच्चाई यही है कि यह बात मुझे आज भी कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है।



आशू की 11 सर्जरी हुईं- कोहनी, हिप, एडी, उंगली, दोनों घुटनों की सर्जरी हो चुकी है, लेकिन इन सबके बावजूद उनकी कड़ी मेहनत और कुछ कर दिखाने की चाह ने उन्हें खेल में बनाए रखा। मुझे याद है 2003 वर्ल्ड कप के दौरान उनकी एंड़ी बुरी तरह चोटिल हो गई थी। उनके लिए इंग्लैंड के खिलाफ अगला मैच खेलना नामुमकिन था, लेकिन नेहरा जी की ज़िद थी कि अगला मैच वह खेलेंगे। अंत में डर्बन के होटल स्टाफ को भी पता चल गया था कि आशू खेलने कि लिेए कितना उत्सुक हैं। अगले 72 छंटे उसने अपनी एंड़ी में 30-40 बार बर्फ लगाई। टेपिंग की, पेन किलर्स खाईं और अगले दिन किसी जादू की तरह खेलने को तैयार थे। लोगों को लगा आशू को कोई चिंता नहीं, लेकिन सिर्फ हम जानते थे कि उसे कितनी फिक्र थी। आशू ने 23 रन देकर 6 विकेट चटकाए और भारत ने इंग्लैंड को 82 रन से हराया।

आशू पूरी तरह से टीम-मैन हैं। 2011 वर्ल्ड कप के दौरान सेमीफाइनल में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ शानदार स्पेल डाला लेकिन दुर्भाग्य से चेटिल हो गए और फाइनल में नहीं खेल पाए। इसके बावजूद वो हस्ता रहता था और सब की मदद के लिए तैयार रहता था। मुंबई में श्रीलंका के खिलाफ फाइनल के दौरान वह ड्रिंक्स, टावेल वगैरह का इंतजाम कराता। बाहर वालों को यह गैर जरूरी बात लगेगी, लेकिन टीम में जब सीनियर खिलाड़ी इस तरह मदद करता है तो यह दिल को छूता है।

नेहरा के पास अच्छा परिवार है। उनके दो बच्चे हैं। बेटा आरुष और बेटी अराएना। आरुष भी बॉलिंग करता है, लेकिन उसका एक्शन अपने पिता से बेहतर है (भगवान का शुक्र है)। आशू अपनी बैटिंग के बारे में कभी विन्रम नहीं था। मैं अपनी हंसी नहीं रोक पाता जब वो बेशर्मी से अपनी बैटिंग को लिजेंड्री कहता है सिर्फ यही नहीं वो ये भी कहता है कि अगर वो एक बल्लेबाज़ होता तो 45 की उम्र तक खेलता। लेकिन कौन जानता है, ये उसका आखिरी मैच है, उसके होमग्राउंड पर, सारी दुनिया देख रही है, क्या पता वो मैच जिताऊ पारी खेले। मुझे इस बात का यकीन है कि मैं अकेला नहीं हूं जो आशू के करियर की पर्फेक्ट एंडिंग चाहता है।

ये वक्त मेरे लिए बेहद भावुक है और मुझे यकीन है कि आशू और उसके परिवार के लिए भी उतना ही भावुक है। मैं क्रिकेट का आभारी हूं जिसने मुझे एक सच्चा दोस्त दिया, जिसे मैं हमेशा प्यार करूंगा।”

नेहरा के खेल को अलविदा कहने पर उनके अन्य साथी खिलाड़ियों ने भी भावुक संदेश लिखे:


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