बेंगलुरू के ये युवा पेड़ों से कीलें और पोस्टर को हटाकर उन्हें देते हैं नया जीवन

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Updated on 31 Mar, 2016 at 12:46 pm

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रविवार का दिन बेंगलुरू के कुछ युवाओं के लिए खास होता है। जी हां, इस दिन वे पेड़ों से कीलें और विज्ञापन के पोस्टर्स हटाकर उन्हें नया जीवनदान देते हैं।

द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये युवा ‘सेव ग्रीन’ नामक एक गैर सरकारी और गैर व्यावसायिक संगठन के सदस्य हैं। यह संगठन पर्यावरण की रक्षा, स्वच्छता अभियान और पानी को बचाने के संबंध में जनजागरण अभियान चलाता है।

‘सेव ग्रीन’ के संस्थापक हेमन्त कहते हैंः

ये विज्ञापन वृक्षों को बेहद नुकसान पहुंचाते हैं। जब इन पर कीलें गाड़ी जाती हैं तो एक छेद हो जाता है, जिससे कीड़ों को पनपने का मौका मिलता है। इस वजह से वृक्षों का बढ़ना भी रुक जाता है और ये बेहद भद्दे दिखने लगते हैं।


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वृक्षों से कीलों और विज्ञापन के पोस्टरों को हटाने का अभियान इसी साल 14 फरवरी से शुरू किया गया है। संस्था के 20 से अधिक सदस्य और अन्य स्वयंसेवी प्रत्येक रविवार को दिन के 11 बजे से 2 बजे तक इस तरह की सफाई का काम करते हैं।

संस्था के सदस्यों में सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल, स्कूल और कॉलेज के छात्रों के अलावा कई ऐसे नागरिक हैं, जिन्हें पर्यावरण से प्रेम है।

यह संस्था जितने भी पोस्टर हटाती है, उसका रिकॉर्ड रखती है। यही नहीं, प्रत्येक पोस्टर से वे उन विज्ञापन एजेन्सियों का नम्बर भी जुटाते हैं, जो इन विज्ञापनों को पेड़ों पर टांगते हैं। यही नहीं, उन एजेन्सियों से व्यक्तिगत तौर पर संपर्क किया जाता है और उन्हें इस बात के लिए मनाया जाता है कि वे भविष्य में विज्ञापन टांगने के लिए किसी पेड़ का इस्तेमाल न करें।

इस टीम ने अब तक ओल्ड एयरपोर्ट रोड, इन्दिरा नगर, एचएसआर लेआउट सहित कई इलाकों में वृक्षों को नया जीवनदान दिया है।

हेमन्त के मुताबिक, सहयोग न करने वाले विज्ञापनकर्ताओं को कानूनी नोटिस भेजा जाती है। सेव ग्रीन के इस अभियान को वृहत बेंगलुरू महानगर पालिका का समर्थन व सहयोग प्राप्त है।

बेंगलोर मीरर के एक रिपोर्ट के मुताबिक, वृक्षों पर विज्ञापन टांगना एक अपराध की श्रेणी में आता है। दोषी पाए जाने पर 6 महीने की सजा और एक हजार रुपए का जुर्माना तक हो सकता है।


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