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हर एक पेड़ को लोहे की कीलो और इश्तहारों से मुक्ति दिलाने का अनूठा प्रयास कर रहे हैं ये युवा

Published on 25 December, 2016 at 1:18 pm By

पेड़ हमारे जीवन के लिए उतने ही महत्वपूर्ण है जितनी की हमारी सांसें। पेड़ प्रकृति का आधार हैं। पेड़ों के बिना प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसी सोच के साथ अहमदाबाद शहर के कुछ युवाओं ने मिलकर ‘हाइली एनेरजाइस्ड यूथ फॉर हेल्पिंग इंडीयंस’ (HeyHI) नामक एक संस्था की शुरुआत की है। इस संस्था का मकसद पेड़ को लोहे की कीलो और इश्तहारों से मुक्ति दिलाना है।


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रात दस बजे के करीब जब शहर का पूर्वी इलाका पार्टी और जश्न के माहौल में डूबा होता है। उस वक्त ये युवा इलाके के पेड़ों पर लगी किले, इश्तहार तथा बैनर निकालने पहुंच जाते हैं।

यदि कोई यह सवाल पूछ भी ले कि ये ऐसा क्यों करते है? तो तपाक से उत्तर आता है कि “सवाल तो ये होना चाहिए कि हम ऐसा क्यों न करे?”

इस संस्था की शुरुआत इस साल के अक्टूबर महीने में रितेश शर्मा ने अपने कुछ साथियों के साथ मिल कर की थी। पेड़ों को कीलों और इश्तहारों के जख्मों से बचाने का यह अनूठा प्रयास है। रितेश बताते हैं-

“पेड़ो से यदि कीले निकाल दी जाएं तो उस पेड़ की आयु कई साल और बढ़ जाती है। लोहे के कीलो पर जंग लग जाता है जो इन पेड़ो को बीमार कर देता है और पेड़ उम्र से पहले ही सूख जाते हैं।”

पेड़ लगाना प्रकृति का संरक्षण व संवर्धन है। ये पेड़ हमें उपजाऊ धरती ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति को भी बचाये रखते हैं, इसलिए पर्यावरण का संरक्षण और वृक्षारोपण की बात विश्व स्तर पर चिंता का विषय है।



बड़े शहरों में जगह की कमी के कारण नये पेड़ लगाना एक समस्या है। ऐसे में संस्था का प्रयास है कि पुराने लगे पेड़ों को बचाया जाए।

पेड़ों को बचाने की इस मुहिम की कर कोई प्रशंसा कर रहा है। इस संस्था के सदस्यों ने मिलकर मात्र दो महीनों में 2800 पेड़ों से करीब 100 किलो कील निकालकर उन्हे बीमार होने से बचाया है।

इस दल में काम करने वाले अधिकतर सदस्य युवा हैं। इनमें से कुछ पढ़ाई कर रहे हैं, तो कुछ नौकरीपेशा हैं। पेड़ों को ऐसे कीलों के रूप में जकड़न से मुक्त कराने के लिए इन युवाओं ने रात का समय चुना है परंतु छुट्टी के दिन ये दिन भर इसी काम में जुटे होते हैं। फेसबुक और व्हाट्सअप पर जगह और समय निश्चित किया जाता है और सन्देश मिलते ही तुरंत कई युवक और युवतियां इस नेक काम को अंजाम देने वहां पहुंच जाते हैं।


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यह मुहीम जितनी दिखने में सरल प्रतीत होती है। उसके विपरीत इस संस्था को मुश्किलों और विरोध का भी सामना करना पड़ता है। दरअसल, जिन लोगो ने अनैतिक तरीके से इन पेड़ों पर अपने इश्तेहार लगाए होते है, वे इन्हें निकालने पर कड़ा विरोध करते हैं। ऐसे में उन्हे अहमदाबाद नगर निगम द्वारा लिए गये अनुमति पत्र को दिखना पड़ता है।

संस्था के सदस्यों का मकसद अगले 6 महीने के भीतर एक-एक इलाके के पेड़ों का संरक्षण करना है, जिसके लिए इन्होने गुजरात हाई कोर्ट में अर्जी देने का भी निश्चय किया है।

HeyHI के मुताबिक शहर के सिर्फ पूर्वी इलाके में ही 24000 क्षतिग्रस्त पेड़ मौजूद है। लोगों द्वारा भेजी गई तस्वीरों और अपने शोध के आधार पर प्राप्त किए गए यह आंकड़े बेहद भयावह है। रितेश शर्मा बताते हैं-

“एलडी इंजीनियरिंग कॉलेज के परिसर में हर पेड़ पर हॉस्टल या पीजी के इश्तेहार लगे होते हैं। यहां से हमने घंटे भर में औसतन 100 कीले निकाली होंगी। तीन घंटे में हम सिर्फ 14 पेड़ों पर ही काम कर पाएं।”


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पुराणों में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि एक पेड़ लगाने से उतना ही पुण्य मिलता है, जितना कि दस गुणवान पुत्रों से यश की प्राप्ति होती है। इसलिए इसकी भी परवरिश ऐसे कीजिए जैसे अपने संतान की करते हैं उन्हे कीलों से ज़ख्मी मत करिए।

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