शिक्षा के लिए आतंकवादियों की गोलियों से टकराने वाली ये है मलाला

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Updated on 12 Jul, 2016 at 9:31 pm

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पाकिस्तानी युवा कार्यकर्ता मलाला युसुफजई, जो लाखों लोगों के लिए एक प्रेरणा है, 12 जुलाई को 19 साल की हो गई है। मलाला ने आतंकवाद से लड़ते हुए, लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठाई है।

लड़कियों के हितों की आवाज़ उठाने वाली मलाला को अक्टूबर 2012 में तालिबान ने अपना निशाना बनाया। 15 साल की उम्र में तालिबानी आतंकियों ने मलाला पर हमला किया, जिसमें गोली उनके सिर पर लगी। कई महीनों तक मौत से लड़ती हुई मलाला, मौत को मात देते हुए अपने नेक काम के साथ एक बार फिर आगे बढ़ती चली।

मलाला की बहादुरी को सम्मानित करते हुए वर्ष 2013 में संयुक्त राष्ट्र ने 12 जुलाई को ‘मलाला दिवस’ घोषित किया है।

malala

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मलाला ने 2009 में BBC के लिए ब्लॉग लिखा, जिसमें उन्होंने तालिबान के क्रूर शासन में अपनी जिंदगी के बारे में बताया। मलाला ने ब्लॉग लिखने की शुरुआत 11 साल की उम्र से ही कर दी थी।

मलाला को 2014 में बच्चों और महिलाओं के शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ने के लिए नोबेल शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी के साथ मलाला 17 साल की उम्र में नोबेल पाने वाली सबसे युवा विजेता बनीं।

मलाला ने महिला शिक्षा सीरियाई रिफ्यूजी, और नाईजीरियाई लड़कियों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

मलाला ने ‘मलाला फंड’ की  सह-स्थापना की।  इस फंड का मकसद नाइजीरिया, पाकिस्तान, केन्या और जॉर्डन जैसे देशों में लड़कियों की प्रारंभिक शिक्षा की पहल में  निवेश करना है।

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