शादी में दहेज़ न लेकर ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने कायम की मिसाल

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Updated on 19 Jan, 2017 at 12:48 pm

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भले ही भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त को ओलिंपिक में स्वर्ण पदक न जीत पाने का मलाल हो, लेकिन उन्होंने अपनी शादी में दहेज न लेकर यह साबित कर दिया है कि उनका दिल सोने का है।

योगेश्वर की यह शादी उन लोगों के लिए मिसाल है, जो लोग आज के दौर में भी दहेज लेते हैं। योगेश्वर देश के जाने माने पहलवानों में से एक हैं। लेकिन इतने बड़े पहलवान होने के बावजूद इस शादी में उन्होंने शीतल के परिवार से शगुन के नाम पर सिर्फ एक रुपए लेकर एक मिसाल कायम की है।

ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता और पद्मश्री से सम्मानित भारत के पहलवान योगेश्वर दत्त की शादी युवाओं के लिए सीख है। बड़े-बड़े पहलवानों को धूल चटाने वाले योगेश्वर शीतल शर्मा के साथ 16 जनवरी को विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए। योगेश्वर की पत्नी शीतल कांग्रेसी नेता जय भगवान शर्मा की बेटी हैं और बीए फाइनल ईयर की छात्रा हैं।

दिल्ली के अलीपुर में हुए शादी के इस समारोह में भाजपा, कांग्रेस और ‘आप’ के नेताओं समेत कई खिलाड़ी शामिल हुए। सभी ने नव दम्पति को भविष्य के लिए शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया।

इस आयोजन में शरीक होने पहुंचे हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने तोहफे से माहौल में चार चांद लगा दिए। सीएम खट्टर ने शादी में योगेश्वर दत्त के गांव भैंसवाल के विकास के लिए 10 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के इस तोहफे की रकम से गांव को चमकाया जाएगा। इस 10 करोड़ ऐलानी तोहफे के बारे में बात करते हुए सीएम ने कहाः


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“योगेश्वर ने पूरी दुनिया में गांव का नाम रौशन किया है। इसलिए आज के दिन मैं उनके गांव की सभी मांगों को पूरा करने का वादा करता हूं। गांव में पीने का पानी, खेत के लिए नहरी पानी, पक्की सड़कें जैसी तमाम जरूरत की चीजों पर काम किया जाएगा।”

योगेश्वर के दहेज न लेने के फैसले पर उनकी मां को उन पर गर्व है। योगेश्वर का कहना है कि उन्हें शीतल से दहेज नहीं, बल्कि परिवार के लिए मान-सम्मान चाहिए। योगेश्वर ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए कहाः

“मैंने देखा है कि मेरे परिवार के लोगों ने अपनी लड़कियों के लिए कितनी मुश्किल से दहेज का पैसा जुटाया था। उनको कितनी परेशानी उठानी पड़ी, मैं जानता हूं। उसके बाद मैंने बड़े होते हुए सिर्फ दो ही चीजें सोची थीं। पहली बात तो यह है कि मैं कुश्ती में बड़ा मुकाम हासिल करूंगा और दूसरा कि दहेज नहीं लूंगा।”

योगेश्वर आज अपने दोनों ही सपनो को हक़ीक़त में बदल चुके हैं। हालांकि, उनको इस बात का दुःख है कि उनकी शादी को देखने के लिए उनके पिता रामेश्वर दत्त और मास्टर सतबीर सिंह जिंदा नहीं हैं, लेकिन योगेश्वर निश्चित रूप से युवाओं के लिए जीती जागती मिसाल हैं।

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