भारत में है दुनिया का दूसरा सबसे सर्द स्थान, ठंड ऐसी जो खून जमा दे

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Updated on 28 Oct, 2017 at 6:46 pm

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भारत की संस्कृति कई चीजों को मिला-जुलाकर बनी है, जिसमें भारत का महान इतिहास, रीति-रिवाज़, परम्पराओं, विचारों और विलक्षण भूगोल का समावेश है। भारत के अनेक रीति-रिवाज़, भाषाएं, प्रथाएं और परम्पराएं मिलकर महान विविधताओं का एक अद्वितीय उदाहरण देती हैं।

आज, हम आपको भारत के एक ऐसे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी जगह माना जाता है और वहां कई लोगों का बसेरा भी है।

यहां हम बात कर रहे हैं जम्मू व कश्मीर राज्य के कारगिल जिले में स्थित एक बस्ती की, जिसका नाम द्रास है। द्रास को ‘लदाख का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है।

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यह बस्ती समुद्र तल से 3230 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे साईबेरिया के बाद दुनिया का दूसरा सबसे सर्द मानवी बसेरा माना जाता है। सर्दियों में यहां का तापमान -45 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और −60 डिग्री सेन्टिग्रेड तक मापा गया है।

द्रास में करीब 1021 लोग कम तापमान और बर्फ के तूफान जैसी कई विकट समस्याओं के बावजूद रहते हैं। यहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, लेकिन यहां कई बौद्ध परिवार भी हैं।

द्रास पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। जो पर्यटक द्रास देखना चाहते हैं, वह सुरु वैली में ट्रेकिंग कर सकते हैं, जो इस बस्ती के पास ही पड़ता है। साथ ही टाइगर हिल जैसी कई अन्य जगहें पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

यहां द्रास वार मेमोरिअल भी है, जो उन सिपाहियों को श्रद्धांजलि देने के लिए स्थापित किया गया था, जिन्होंने कारगिल की लड़ाई में देश की रक्षा हेतु अपनी जान न्योछावर कर दी। वार मेमोरिअल के पास ही एक संग्रहालय भी है, जहां पर युद्ध से जुड़ी निशानियों को सहेज कर रखा गया है।

जो पर्यटक द्रास जाना चाहते हैं वह हवाईयात्रा, रेलयात्रा या सड़कमार्ग से यहां पहुंच सकते हैं। द्रास जाने का सबसे सही समय जून से सितम्बर के बीच होता है, जो वहां गर्मी का मौसम होता है।


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