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दुनिया में जहाजों का सबसे बड़ा ‘कब्रिस्तान’ भारत में है

Updated: 5:38 pm 18 Jul, 2017

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हर चीज़ की एक उम्र होती है और उस उम्र के बाद वह बेकार यानी कबाड़ हो जाती है और उसका कोई इस्तेमाल नहीं होता। बड़ी-बड़ी शिप यानी जहाजों का भी यही हाल है। टनों सामान और हज़ारों लोगों का भार उठाने के बाद जब ये जहाज रिटायर या यू कहें कि बेकार हो जाते हैं, तब क्या होता है? इन कबाड़ जहाज़ों को एक खास जगह पर तोड़ा जाता है, जिसे बेक्रिंग शिपयार्ड यानी जहाज़ों का कब्रिस्तान भी कहते हैं और दिलचस्प बात ये है कि एशिया का सबसे बड़ा शिप ब्रेकिंग यार्ड भारत में ही है।


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दुनिया का सबसे बड़ा शिपयार्ड गुजरात के भावनगर से करीब 50 किमी की दूरी पर स्थित अलंग में है। इसकी शुरुआत 30 साल पहले 1983 में हुई थी। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यहां दुनिया भर के लगभग 90 प्रतिशत जहाज (प्रतिवर्ष लगभग 1500)  कबाड़ होने के बाद आते हैं। यहां जहाजों को तोड़ा जाता है। दूर से देखने पर ये जगह आपको किसी मलबे जैसी ही नज़र आएगी, मगर इसका रुतबा काफी बड़ा है। आज अलंग शिपयार्ड को टक्कर देने के लिए चीन और पाकिस्तान जैसे देश पूरा जोर लगा रहे हैं।

अलंग शिपयार्ड से जुड़ी खास बातें

  • 30 वर्ष पहले यह जगह उजाड़ थी, लेकिन आज दुनिया के सबसे बड़े शिपयार्ड होने का तमगा इसके नाम है।
  • आप इसे दुनिया का सबसे बड़ा कबाड़खाना भी कह सकते हैं, लेकिन इस कबाड़खाने की बदौलत लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी चलती है।
  • जहाज़ों के कबाड़ से यहां हर साल लगभग 4 लाख मैट्रिक टन फर्नीचर, स्टील और लोहा निकलता है।
  • अलंग गुजरात राज्य को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का टैक्स चुकाकर सरकार की तिजोरी भी भरता है।
  • अलंग शिपयार्ड पर अब तक कई डॉक्युमेंटरी फिल्में भी बन चुकी हैं।
  • इंग्लैंड के लेखक ईयान बैंकस की सन् 1999 में प्रकाशित हुई प्रसिद्ध नॉवेल ‘बिजनेस’ में भी इसका ज़िक्र किया है।
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