पटरी पर दौड़ी ‘फेयरी क्वीन’, आप भी ले सकते हैं इस सफर का मजा

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Updated on 13 Feb, 2017 at 4:32 pm

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विश्व के सबसे पुराने स्टीम इंजन फेयरी क्वीन ने एक लंबे अंतराल के बाद फिर से ट्रैक पर वापसी कर ली है।

आज भले ही विकास के दौर में ट्रेन का चेहरा बदल गया हो, बिजली और डीजल से चलने वाली ट्रेनें आ गई हो, लेकिन पटरियों पर दौड़ने वाली ट्रेन की शुरुआत भाप के इंजन से ही हुई थी।

अब एक बार फिर आप भाप के इंजन वाली ट्रेन में सफर का मजेदार अनुभव ले सकते हैं। 11 फरवरी से दिल्ली से हरियाणा के रेवाड़ी के बीच इस हेरिटेज ट्रेन की 5 साल के बाद फिर शुरुआत हो गई है।

यह ट्रेन दिल्ली कैंट से प्रतिदिन रेवाड़ी और रेवाड़ी से दिल्ली कैंट के लिए एक फेरा लगाएगी।

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पांच साल बाद अपनी पहली ट्रिप में 11 फरवरी को यह ट्रेन दिल्ली से सैलियानों को लेकर रेवाड़ी पहुंची, जिसमें भारतीयों के साथ बड़ी तादाद में विदेशी सैलानी भी सवार थे।

सैलानियों के लिए इस छुक-छुक ट्रेन के सफर का अनुभव यादगार रहा।

सैलानी इस बात से उत्सुक और हैरान थे कि एक जमाने में चलने वाले स्टीम इंजन, जो पूरी दुनिया में अब बंद हो चुके हैं और दुर्लभ हैं, उस  ऐतिहासिक धरोहर को भारत ने न केवल सम्मानित ढंग से संभाल कर रखा हुआ है, बल्कि यह इंजन आज भी पूरी तरह से काम कर रहा है।



साल 1855 में बने भाप के इस इंजन का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

रेल के चालक के अनुसार, इस फेयरी क्वीन इंजन में पानी के टैंक की क्षमता मात्र 3 हजार लीटर है और दिल्ली से रेवाड़ी तक सफर करने में इसे दो बार पानी लेना पड़ता है। वहीं, इस ट्रेन की स्पीड भी ज्यादा नहीं है। 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार है।

इसकी आवाज सुनते ही लोग इसे देखने के लिए निकटवर्ती अपने घरों से निकल पड़ते हैं।

 


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