इस एयरपोर्ट को बनाने में खर्च हुए थे करोड़ों रुपए, कभी इस्तेमाल नहीं किया गया

Updated on 17 Oct, 2017 at 4:21 pm

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दुनिया का सबसे ‘यूजलेस एयरपोर्ट’ का अब ‘यूज’ होना शुरू हो गया है।

ब्रिटिश आइलैंड सेंट हेलेना पर बने एयरपोर्ट पर पहली कमर्शियल फ्लाइट का बीते शनिवार आगमन हुआ। इस पहली फ्लाइट से 78 यात्री साउथ अफ्रीका से यहां पहुंचे। दुनियाभर में यह यूजलेस एयरपोर्ट के नाम से मशहूर है, जो 2016 में ही बनकर तैयार हुआ था। एक साल बाद कमर्शियल फ्लाइट यहां पहुंच चुकी है, लिहाजा यह सुर्ख़ियों में है।

गौरतलब है कि इस एयरपोर्ट को बनाने में 2453 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। यह आइलैंड साउथ अटलांटिक के मध्य में स्थित है, जहां फ्रान्स के सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट निर्वासन के समय रहा करते थे। महज 4500 की आबादी वाला यह आइलैंड पत्थर और चट्टानों से भरा हुआ है। यह 1658 से ब्रिटेन की कॉलोनी रहा है। यह एक पर्यटन स्थान है, जहां दूर-दूर से लोग घूमने आते हैं। यही कारण है कि 1930 से ही यहां एयरपोर्ट बनाए जाने के प्रयास हो रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शनिवार को सेंट हेलेना आइलैंड पर सभी पैसेंजर एयरलिंक के एयरक्राफ्ट से स्थानीय समयानुसार 1.58 बजे एयरपोर्ट पर उतरे। जोहान्सबर्ग से आ रही यह फ्लाइट 45 मिनट की देरी से यहां पहुंची।

गवर्नर लीसा फिलिप्स कहती हैंः

“यहां पहली कमर्शियल फ्लाइट की लैंडिंग हुई है। लेकिन पिछले 18 महीनों से इसका इमरजेंसी मेडिकल सेवा के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। भले ही इसे ख़बरों में यूजलेस कहा जाता है, लेकिन इस आइलैंड के लोगों के लिए यह बहुत उपयोगी है।”


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पहली फ्लाइट के जरिए यहां पहुंचने वाली ब्रिटिश ट्रैवल एजेंट लिबि वायर-ब्रीन ने कहा कि यह उनके लिए भावनात्मक समय है। उनको भरोसा नहीं था कि इस एयरपोर्ट का कभी कमर्शियल फ्लाइट सेवा के लिए उपयोग होगा। वे यहां पर्यटकों को एयरपोर्ट दिखाने लाती रही हैं।

 

ज्ञात हो कि इस एयरपोर्ट को डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी) ने बनवाया है। बहुत ही दुर्गम जगह पर अवस्थित होने के कारण इसकी लागत बहुत ज्यादा हो गई। साथ ही तेज हवाओं के कारण फ्लाइट सेवा बार-बार टाली जाती रही। बड़े हवाई जहाजों के लिए सुविधाजनक बनाने को लेकर भी परिसेवा चालू करने में विलम्ब करना पड़ा।

यूजलेस एयरपोर्ट!

सेंट हेलेना एक ब्रिटिश कॉलोनी रहा है, लिहाजा इसका विकास धीमा हुआ है। इसको शुरू करने में बहुत ज्यादा खर्च होने की वजह से मीडिया में इसकी आलोचना हुई थी। ब्रिटिश नागरिकों को यहां तक आने में लंबा सफ़र करना पड़ता है। इसको चालू करने में हुई देरी ही इसे यूजलेस बना दिया। हालांकि, अब सप्ताह में एक बार साउथ अफ्रीका से फ्लाइट यहां आएगी।

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