किताब में नाम आने भर से बदल गई जिन्दगी, छोटी सी दुकान से बनी बड़ी पहचान

Updated on 31 Jul, 2018 at 12:08 pm

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कब किसकी किस्मत पलट जाए कहा नहीं जा सकता है, इसलिए सभी को अपनी पूरी ईमानदारी व सच्ची निष्ठा से लगातार काम करते रहना चाहिए। एक न एक दिन आपका भाग्योदय सुनिश्चित है। जोधपुर में ऑमलेट की छोटी सी दुकान से अपनी पहचान बनाने वाले इस शख्स की कहानी जानकर हैरानी होगी तो प्रेरणा भी मिलेगी।

जोधपुर शहर का ये ऑमलेट शॉप पर्यटकों में बेहद लोकप्रिय है!

 

 


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इस दुकान को चलाने वाले रामकिशन 1974 के आसपास घंटाघर के बाहर नॉनवेज बेचा करते थे। सालों आर्थिक तंगी से गुजरते रहे और एक दिन वर्ष 1981 में एक शख्स ने दुकान पर आकर ऑमलेट की फरमाइश की। रामकिशन ने उस शख्स को बड़े मन से ऑमलेट बनाकर खिलाया। उसके बाद उसकी किस्मत पलट गई। ऑमलेट खाने वाला शख्स पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय किताब लोनली प्लेनेट से जुड़ा हुआ था। उसने रामकिशन को दुकान का नाम ‘गरीब नवाज’ से ‘ऑमलेट शॉप’ कर देने की सलाह देकर चला गया।

 

 

कुछ दिनों बाद लोनली प्लेनेट के नए संस्करण में इस स्वादिष्ट ऑमलेट दुकान के बारे में जानकारी छपी। फिर देखते ही देखते रामकिशन की किस्मत बदल गई। इसके बाद पर्यटकों की सभी गाइड बुक में इस दुकान की जानकारी छपने लगी। आज रामकिशन 27 तरह के ऑमलेट बनाते हैं जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बनाए जाते हैं।

 



 

रामकिशन कहते हैंः

“जैसे-जैसे दुकान पर्यटकों में प्रसिद्ध होती गई वैसे ही हमारी बिक्री बढ़ती गई। लेकिन आज भी दुकान का स्वरूप पुराना ही है। हम सुबह नौ से लेकर रात बारह बजे तक सेवाएं देते हैं। रोजाना डेढ़ से दो हजार अंडों से बने ऑमलेट की बिक्री इस दुकान से हो जाती है। इस काम में अब मेरा बेटा घनश्याम भी मदद करता है।”

 

 

बताते चलें कि रामकिशन की दुकान से रोजाना लगभग 20 हजार रुपए के ऑमलेट बिकते हैं। ये ऑमलेट 30 रुपए से 100 रुपए तक की अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध हैं। ये भी आश्चर्य की बात है कि ऑमलेट को लेकर दुनिया भर में प्रसिद्ध रामकिशन खुद कभी अंडा नहीं खाते हैं।


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