काश! भारत में लागू हो जाते ये अनोखे वर्क लॉ, तो घट जाता कर्मचारियों का तनाव

3:17 pm 14 Feb, 2018

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सुबह 10 बजे से लेकर रात के 7-8 बजे तक ऑफिस में बैठकर लगातार काम करते रहना… आजकल के नौकरीपेशा लोगों की हालत यही है। 10-6 की सरकारी नौकरी कम ही लोगों को नसीब होती है। ज़्यादातर तो प्राइवेट नौकरी में ही फंसे रहते हैं, जहां कर्मचारी को जब तक गन्ने की तरह निचोड़ न लिया जाए, तब तक उन्हें फुरसत नहीं मिलती। हर दिन सुबह उठकर ऑफिस जाना जंग पर जाने जैसा ही लगता है, क्योंकि वहां काम के अलावा और कुछ नहीं होता। हालांकि, दुनिया में कुछ देश ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने खास नियम बनाकर वर्कप्लेस को फनप्लेस बना दिया है। अगर इन देशों के अनोखे कानून भारत में भी लागू हो जाएं तो लोग नौकरी से जी नहीं चुराएंगे।

1. जापान में कर्मचारियों को सोने का समय मिलता है

ऑफिस टाइम में अगर गलती से भी आंखें झपकी तो आप तो गए काम से, क्योंकि अगर किसी ने आपको ऐसा करते देख लिया और बॉस को शिकायत कर दी, तो आपका प्रमोशन तो गया कचरे के डिब्बे में। लेकिन जापान में ऐसा नहीं है। जापान में लोग रात में काम करने की वजह से ठीक से सो नहीं पाते, इसलिए वहां की अधिकांश कंपनियां कर्मचारियों के लिए दिन में सोने की व्यवस्था करती हैं। उनका मानना ह कि इससे कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ेगी और वो अच्छा काम करने के लिए प्रेरित होंगे।

2. नीदरलैंड में कर्मचारियों को 3 दिन काम के बाद छुट्टी मिलती है

telegraph


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हर नौकरी करने वाले को वीकेंड का इंतज़ार रहता है, क्योंकि तभी उन्हें का से थोडी राहत मिलेगी, मगर नीदरलैंड के लोगों को वीकेंड के लिए इंतज़ार भी नहीं करना पड़ता क्योंकि वहां 3 दिन के बाद ही वीकेंड हो जाता है। यहां की सरकार का मानना है कि कर्मचारियों को ज़्यादा यात्रा करनी चाहिए। डच कानून के मुताबिक हर नागरिक को मातृत्व, पितृत्व और लंबी छुट्टिया लेने का हक है।

3. ऑस्ट्रिया में छुट्टी में भी मिलते है पैसे

यहां 6 महीने नौकरी करने के बाद हर कर्मचारी को 30 दिन की पेड लीव मिलती है। इतना ही नहीं यदि कर्मचारी की उम्र 25 साल से अधिक है तो उसे 30 की बजाय 36 दिन की वेकेशन लीव मिलती है। यदि आप ये छुट्टियां नहीं लेते और उस समय भी काम करते हैं तो इसके लिए आपको अतिरिक्त पैसे दिए जाते हैं।

4. फ्रांस में ऑफिशियल ईमेल को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है

एक बार ऑफिस से निकल जाने के बाद आप ऑफिशियल ईमेल को अगर नज़रअंदाज़ करते हैं तो कल आने के बाद आपको बॉस की डांट नहीं सुननी पड़ेगी। जी हां, ऐसा फ्रांस में होता है। हमारे देश के कर्मचारियों की अभी इतनी अच्छी किस्मत नहीं है। फ्रांस में आप ऐसा कर सकते हैं। इससे लोगों की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बना रहता है।

5. यूरोपियन कोर्ट ट्रैवलिंग टाइम को भी वर्क टाइम मानता है

हमारे देश में वर्क टाइम ऑफिस में कदम रखने के बाद ही शुरू होता है, इससे फर्क नहीं पड़ता कि ऑफिस पहुंचने में आपको 3 घंटे लगे या 4 घंटे। हालांकि, यूरोप में ऐसा नहीं है। यहां के कर्मचारी बहुत खुशकिस्मत हैं, क्योंकि यहां ट्रैवलिंग टाइम को भी ऑफिस टाइम ही माना जाता है। इतना ही नहीं, अगर सुबह या शाम को क्लाइंट के साथ कोई अपॉयन्टमेंट है तो कंपनी ये सुनिश्चित करती है कि ये कर्माचरी के घर के आसपास ही हों। यूरोपियन कोर्ट का ये फैसला कर्मचारियों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

6. पुर्तगाल में नियोक्ता किसी कर्माचरी को नौकरी से नहीं निकाल सकता

यदि ये कहा जाए कि पुर्तगाल वर्किंग क्लास के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है तो गलत नहीं होगा, क्योंकि इस देश के कानून के मुताबिक, यहां कोई भी बॉस अपने कर्माचरी को नौकरी से नहीं निकाल सकता है। यहां नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट में कोई टर्मिनेशन क्लॉज़ नहीं होता। यदि कोई नियोक्ता किसी कर्मचारी को निकालना चाहता है तो उसे उस कर्माचरी को अच्छा खासा रेजिग्नेशन पैकेज देना होता है। हमारे देश में अगर ऐसा कोई कानून आ जाए तो कर्माचरियों की चांदी हो जाएगी।

7. बेल्जियम में मिलता है करियर ब्रेक

अगर आप बेल्जियम में नौकरी करते हैं तो सबसे अच्छी बात ये है कि आप बिना नौकरी जाने के डर के कुछ दिनों के लिए करियर से ब्रेक ले सकते हैं और आपका बॉस आपको इससे रोक नहीं सकता। इतना ही नहीं, इस दौरान आपकी आर्थिक ज़रूरतें भी पूरी की जाएंगी।

8. जर्मनी में शनिवार को काम करने पर प्रतिबंध है

वीकेंड में काम करना जर्मनी में प्रतिबंधित है। कोई भी नियोक्ता अपने कर्मचारियों से वीकेंड पर काम नहीं करवा सकता।

इन देशों के कानून जानने के बाद आपके मन में आ रहा होगा कि काश हमारे देश में इनमें से कुछ कानून लागू हो जाते तो नौकरी पेशा लोगों को डेडलाइन और घर पर भी ऑफिस के काम के तनाव से राहत मिलती।


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