महाराष्ट्र के गांव में महिलाओं ने बनाया ‘नो सुसाइड जोन’, रुकेगी किसान आत्महत्या!

Updated on 2 Nov, 2017 at 4:13 pm

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किसानों द्वारा आत्महत्या की समस्या महाराष्ट्र सहित समूचे देश के लिए शर्मनाक बात है। इससे न केवल उस किसान का घर-परिवार पूरी तरह नष्ट हो जाता है, बल्कि सरकार की छवि भी बिगड़ती है।

ऐसे में महाराष्ट्र के एक गांव की महिलाओं ने इसे ‘नो सुसाइड ज़ोन’ बनाने को कमर कस ली है। यहां के हिंगलाजवाडी गांव की महिलाओं ने एक दृढ़ संकल्प लेकर गांव को आत्महत्या मुक्त कराने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। इनका संकल्प गांव को प्रगति के पथ पर ले जा रहा है।

महिलाओं ने लिया संकल्प

महज 3 हजार की जनसंख्या वाले इस गांव में बड़े बदलाव हो रहे हैं। महिलाओं के संकल्प के अनुसार गांव के पुरुष दोपहर के वक़्त घर का काम करते हुए दिखाई देते हैं, तो महिलाएं खेती-किसानी कर रही हैं। इन्होंने आपस में अपनी भूमिका ही बदल ली हैं, जिससे सुधार की गुंजाइश पर काम किया जा सके। बता दें कि सेल्फ हेल्प ग्रुप के ये महिलाएं काफी सशक्त हैं और इनका दबदबा है।


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महिलाएं बाजार सहित बाहर के सभी काम करती हैं तो पुरुष की भूमिका घरों तक सीमित हैं। बहरहाल खेती में मुनाफे को लेकर ये महिलाएं नित नए प्रयोग कर रही हैं। वित्तीय व्यवस्था सुधारने के लिए नए मॉडल पर काम किया जा रहा है।


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किसान रेखा शिंदे का कहना हैः

“कम वर्षा और सूखा क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या है। फसल खराब होने से किसान लगातार सुसाइड कर रहे थे। बढ़ती आत्महत्या की घटनाों को देखते हुए हमने संकल्प लिया कि अब ऐसा नहीं होने देंगे। हम खुद जिम्मेदारी लेकर परिवर्तन लाएंगे।”

ये महिलाएं उन किसान परिवारों की भी मदद कर रही हैं, जिन्होंने कभी खराब वित्तीय हालत की वजह से आत्महत्या कर ली थी। सेल्फ़ हेल्प ग्रुप की मदद से महिलाएं मुर्गा पालन केंद्र, बकरी पालन, डेयरी व्यवसाय, कपड़े की दुकान सहित कई व्यवसाय चला रही हैं।

ये महिलाएं इस बात की सबूत हैं कि तस्वीर बदलने के लिए सरकार को कोसने से बेहतर है, खुद प्रयास किए जाएं!


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