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ये 13 तथ्य महिलाओं को समझने में आपकी मदद कर सकते हैं

Updated on 20 July, 2017 at 7:34 pm By

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अधिकतर मामलों में पुरुषों को यह शिकायत होती है कि वे महिलाओं को समझ नहीं पाते हैं, लेकिन इन तथ्यों को जानकर आप समझ जाएंगे कि महिलाएं हक़ीक़त में बहुत जटिल प्राणी होती हैं।

1. महिलाओं के हॉर्मोन में लगातार बदलाव होते रहते हैं, जिसके कारण उनकी संवेदनशीलता, उनके हाव-भाव व ऊर्जा में भी बदलाव होते हैं।

2. 80 फीसदी महिलाओं को पी.एम. झेलना पड़ता है।

ये माहवारी से एक दो हफ्ते पहले के लक्षण होते हैं, जिस कारण उनमें शारीरिक और मानसिक बदलाव देखने को मिलता है। माहवारी शुरू होने के 10 दिन बाद एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन नामक हॉर्मोन काफ़ी बढ़ जाते हैं, इसी कारण उनमें कामोत्तेजना बढ़ जाती है। इस के एक सप्ताह बाद, प्रोजेस्टेरोन नामक हॉर्मोन के बढ़ने पर उनकी इच्छा आलिंगन और विश्राम करने की होती है। इसके एक सप्ताह बाद प्रोजेस्टेरोन में कमी आने के कारण उनमें थोड़ा चिड़चिड़ापन आ जाता है।

3. अधिकतर महिलाओं के व्यवहार में माहवारी शुरू होने के 12 से 24 घंटे पहले काफ़ी चिड़चिड़ापन आ जाता है ।

4. महिलाएं संकेतों या हाव-भाव समझने में पुरुषों के अपेक्षा अधिक माहिर होती हैं। माना जाता है कि उनमें यह विशेषता इसलिए भी होती है, क्योंकि वे बच्चों की देखरेख करना अच्छे से जानती हैं।

तो अब आप होशियार हो जाइए, क्योंकि महिलाएं पुरुषों की सोच को अच्छी तरह समझ सकती हैं। चाहे आप उनके बॉस हों, उनके पति हों या कोई और।

5. इसी समझ के कारण वह अक्सर लोगों की चुप्पी को बर्दाश्त नहीं करतीं।


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उन्हें भले ही कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया दे, पर वे नहीं चाहतीं कि कोई बिना प्रतिक्रिया दिए अपने मन में ही उनके बारे में कोई धारणा रखे ।

6. यदि उनके सामने कोई ऐसी परिस्थिति आए, जिसमें उन्हें कोई डर या धमकी महसूस हो तो ऐसे समय में वे दुश्मन से लड़ने या भागने की बजाए दूसरों से मदद लेना पसंद करती हैं।

ऐसी हालत में वह काफ़ी चतुराई के साथ सहयोग प्राप्त करने में सफ़ल रहती हैं।

7. एक शोध में ये पाया गया है कि महिलाएं कम तनाव को ही झेलने में सक्षम हैं।



अधिक तनाव कि स्थिति को वह नहीं संभाल पाती हैं। इसी कारण महिलाएं अधिकतर पी.टी.एस.डी., अवसाद, चिंता आदि का शिकार हो जाती हैं।

8. महिलाओं की काम वासना पुरुषों की अपेक्षा जल्दी नहीं उभरती। उन्हें कामोत्तेजित करने के लिए और सेक्स के दौरान चरम-सुख पाने के लिए, उन्हें शारीरिक रूप के साथ, मानसिक रूप से भी कामोत्तेजित करना पड़ता है।

इसीलिए महिलाओं के साथ सम्भोग से पहले चुम्बन, आलिंगन आदि उनकी काम वासना को बढ़ाने में बहुत उपयोगी होता है।

9. जी-स्पॉट का विज्ञान में अभी तक कोई प्रमाण नहीं है।

यह क्लाइटोरिस का आंतरिक रूप से विस्तार भी हो सकता है, या एक विशेष प्रकार का ऊतक(टिश्यू) हो सकता है या ये केवल एक भ्रम भी हो सकता है।

10. महिलाओं के मस्तिष्क का आकार गर्भावस्था के दौरान 4% छोटा हो जाता है और यह प्रसव के छह माह बाद अपने सामान्य रूप में आ जाता है।

सोसाइटी फॉर एंडोक्रिनोलॉजी बी.ई.एस. ने इंग्लैंड में एक कॉन्फ़्रेन्स के दौरान अपने शोध को प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन में होने वाले बदलाव के कारण याददाश्त संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

11. वर्ष 2004 में “डेवलपमेंटल साइकोबायोलॉजी” के एक शोध में पाया गया कि भले ही कोई महिला कभी गर्भवती न रही हो, परंतु किसी बच्चे की देखभाल करने या उसे गोद में लेने से उनके मातृत्व संबंधी हॉर्मोन का स्त्राव होने लगता है।

12. महिलाएं जब लगभग 43 से 47/48 की उम्र तक पहुंचती हैं, तो वह एक ‘दूसरी किशोरावस्था’ के दौर से गुज़र रही होती हैं, जिसको पेरिमेनोपौज़ भी कहा जाता है।

इस दौरान उन्हें रात में पसीना, अनियमित माहवारी जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इस दौर में वे किशोरियों की तरह मनमौजी हो जाती हैं।

13. एक पूर्ण परिपक्व पुरुष की अपेक्षा एक परिपक्व महिला काफ़ी ज़ोखिम उठाने वाली और किसी भी मुद्दे पर पूरे खुलेपन के साथ विरोध जताने वाली हो जाती है।


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वह रोमांच को काफ़ी पसंद करने लगती हैं। साथ ही उन्हें घूमने-फिरने, पढ़ाई, सम्भोग, करियर आदि का भी काफ़ी शौक हो जाता है।

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