हिजाब और बुर्के में क्रिकेट खेलना आजादी का प्रतीक है या गुलामी का?

Updated on 3 Oct, 2017 at 9:30 pm

Advertisement

क्रिकेट का खेल भारत में खासा लोकप्रिय है। हालांकि, महिलाओं को क्रिकेट खेलते कम ही देखा जाता है। इन दिनों भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सफलता ने महिलाओं में भी क्रिकेट को लेकर जुनून पैदा कर दिया है, तब कहीं जाकर महिला क्रिकेट लोकप्रिय हो रहा है।

अब एक नई खबर कश्मीर से है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, यहां की महिला क्रिकेटरों ने हिजाब और बुर्का पहन कर क्रिकेट खेलना शुरू किया है, जो अपने आप में एक नई बात है। आपको भी लग रहा होगा कि क्या बुर्का पहनकर क्रिकेट खेलना मुमकिन है?

इस तस्वीर को देखकर आपका भ्रम दूर हो जाएगा।

बुर्का पहनकर क्रिकेट खेलने वाली ये लड़कियां दरअसल बारामूला के सरकारी महिला कालेज में पढ़ती हैं।

इस कॉलेज में पढ़ने वाली इंशा ने कहाः”खेल और परंपरा को साथ लेकर चलने का संदेश देना चाहती हूं. ‘बेखौफ आजाद रहना है मुझे।’ ये मेरा फेवरिट अल्फाज है जो आमिर खान के टाक शो ‘सत्यमेव जयते’ से प्रेरित है। हमलोगों ने बुर्के और हिजाब में क्रिकेट खेलकर परंपरा और खेल के जुनून के बीच संतुलन बनाया है।’


Advertisement

सवाल यह उठता है कि महिलाओं का क्रिकेट खेलना काबिले-तारीफ है, लेकिन बुर्के में यह खेल कितना जायज है? यह भी सवाल उठता है कि हिजाब या बुर्के में क्रिकेट खेलना आजादी का प्रतीक है यह गुलामी का?

रिपोर्ट में इस कॉलेज के प्रोफ़ेसर रहमतुल्लाह मीर के हवाले से बताया गया है कि कालेज में खेलों का बुनियादी ढांचा ठीक नहीं है। यही वजह है कि इस तरह की कोशिश शुरू की गई है।

 

वैसे कश्मीर में क्रिकेट खेलने की महिलाओं की हिम्मत को दाद देनी चाहिए। हालांकि, यह सवाल भी खड़े करता है। आपको क्या लगता है कि क्या वाकई यह बदलाव की बयार है?

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement