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सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले में इन 5 महिलाओं का संघर्ष शामिल है

Updated on 24 August, 2017 at 4:24 pm By

तलाक, तलाक, तलाक… इस कुप्रथा पर विराम लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। अब तीन तलाक असंवैधानिक बन गया है। कोर्ट के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के विचार शेयर किए जा रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि यहां तक पहुंचने के लिए महिलाओं ने लम्बी लड़ाई लड़ी है।

मामले को सुप्रीम कोर्ट तक लाने का काम कुछ बहादुर महिलाओं ने किया। आइए हम उन 5 महिलाओं के बारे में जानते हैं, जिनके प्रयास और संघर्ष ने देश की मुस्लिम महिलाओं को हक दिलाने का काम किया है।

सायरा बानो


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सायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कर तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती देने का काम किया था। बानो उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं, जो खुद इस कुरीति की शिकार रह चुकी हैं। उन्होंने याचिका में मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह प्रथा पर भी बैन लगाने की मांग की थी। दाखिल हुए अर्जी के अनुसार, तीन तलाक संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

सायरा बानो ने मीडिया को बताया कि उन्होंने कुमायूं यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में एमए किया हुआ है। उनकी शादी 2001 में हुई और पति ने 10 अक्टूबर 2015 को तलाक दे दिया। वे अपने मायके में अपने दो बच्चों के साथ रहती हैं। हक के लिए लड़ते हुए बानो ने कहा था कि बच्चों का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। उनको अपना हक चाहिए।

आफरीन रहमान



सायरा बानो की तरह ही जयपुर की आफरीन रहमान ने तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की थी। उनकी शिकायत थी कि पति सहित उनके ससुराल वालों ने दहेज के लिए उनको मारपीट कर घर से निकाल दिया। फिर इंदौर में रहनेवाले पति ने तलाकनामा स्पीड पोस्ट से भिजवा दिया। न्याय की आस में वो कोर्ट पहुंची थी।

अतिया साबरी

यूपी-सहारनपुर की रहनेवाली आतिया साबरी पर तब कहर बरसा जब उनके पति ने कागज पर तीन तलाक लिखकर दे दिया। उनके पति और ससुर उनपर दहेज़ के लिए दबाव बना रहे थे। लगातार दो बेटी होने पर ससुराल वाले उनसे नाराज थे। साबरी की शादी 2012 में हुई थी। तलाक के बाद उन्होंने कोर्ट का रास्ता खटखटाया।

गुलशन परवीन

इसी तरह गुलशन, जिनकी शादी 2013 में हुई थी, तीन तलाक की शिकार हुई। उनका एक बेटा भी है। यूपी-रामपुर की रहने वाली गुलशन परवीन को उनके पति ने 10 रुपये के स्टांप पेपर पर तलाक दे दिया। उनको कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो गया, तब जाकर उन्होंने इस कुरीति को चुनौती दी।

इशरत जहां


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पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत जहां ने भी तीन तलाक की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। इशरत ने याचिका दायर कर कहा था कि उनके पति जो दुबई में रह रहे थे, उन्होंने फोन पर ही तलाक दे दिया। इशरत का निकाह 2001 में हुआ था। उनके पति ने बच्चे को भी उनसे दूर कर दिया था। इशरत ने याचिका में कहा था कि ट्रिपल तलाक गैरकानूनी है और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन है।

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