एक नेक मकसद के लिए यह महिला साड़ी पहनकर दौड़ी 42 किलोमीटर, आप भी करेंगे सलाम

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Updated on 2 Sep, 2017 at 2:46 pm

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“क्या कभी आपने हाथों से कपड़े बुनने वाले कारीगरों को देखा है? कपडे के एक-एक धागे को कैसे हाथों से पिरोया जाता है… और यह उन हस्तशिल्पी कारीगरों की अथक मेहनत को दर्शाता है जो अपने हाथों से इन सुंदर कपड़ों को तैयार करते हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि इन्हें उतनी ख्याति नहीं मिलती, जिसके ये असल हकदार हैं।”

यह कहना है हैदराबाद की रहने वाली माइक्रोसॉफ्ट में बतौर आईटी मैनेजर काम करने वाली जयंती संपत कुमार का।

44 वर्षीया जयंती ने हाल ही में अद्भुत तरीके से हथकरघा उद्योग के प्रति अपने प्रेम और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए अनोखा रास्ता चुना। उन्होंने हैदराबाद में आयोजित फुल मैराथन में साड़ी पहनकर हिस्‍सा लिया और 42 किलोमीटर की दूरी पांच घंटे से कम समय में ही पूरी कर ली।

जयंती के मैराथन में साड़ी पहनने के पीछे हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के साथ-साथ एक और उद्देश्य था। वह बताना चाहती थीं कि साड़ी में काम करना या इसे पहनना असहज नहीं बनाता।


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जयंती कहती हैंः

“हर किसी को वो पहनना चाहिए जिसमें वह सहज हो, और वो एक साड़ी भी हो सकती है। मैं ये दिखाना चाहती हूं कि साड़ी पहनकर भी सभी काम किए जा सकते हैं।”

लेकिन साड़ी पहनकर मैराथन में भाग लेना आसान बात नहीं थी। इसके लिए जयंती ने बाकायदा ट्रेनिंग की। जनवरी 2016 से हैदराबाद के धावकों के साथ प्रशिक्षण शुरू किया। जयंती ने बताया कि कैसे इसके बाद वह एक वर्ष में 5 से 42 किमी तक पहुंच गईं।

यह सब जयंती के लिए आसान नहीं था। पहले छह गज व नौ गज की साड़ी को महाराष्ट्रियन स्‍टाइल और मदीसार स्‍टाइल में बांध कर दौड़ने का प्रयास किया। इन स्टाइल में दौड़ने में परेशानी हुई। साड़ी पैरों में फंस जाती। इस दौरान वह कई बार फ‍िसल कर गिरी भी, लेकिन आखिरकार कुछ संशोधनों के साथ मदीसार स्‍टाइल में साड़ी को बांधकर उन्हें सफलता मिली।

साथ ही आपको बता दें कि जयंती कुमार ने यह दौड़ सैंड़ल पहनकर पूरी की। वह कहती हैं कि वह इस दौड़ को नंगे पैर पूरा करना चाहती थी, लेकिन उनके पैर में पत्थर चुभने की वजह से वह ऐसा नहीं कर पाईं।

जयंती कुमार ने भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए साड़ी पहनकर मैराथन पूरी की है। उन्होंने फिलहाल गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड में अपना नाम दर्ज करवाया है। वह साड़ी पहनकर सबसे तेज दौड़ने वाली महिला हैं।

गौरतलब है कि हथकरघा वस्‍त्र और हथकरघा बुनकर भारत की समृद्ध संस्‍कृति, विरासत और परंपरा का एक अभिन्‍न अंग है। दुनिया में सबसे अधिक हथकरघा बुनकर भारत में ही हैं। दुनियाभर में हाथ से बुने हुए कपड़े का 95 प्रतिशत भारत से आता है।

हथकरघा उद्योग देश के वस्‍त्र उत्‍पादन में करीब 15 प्रतिशत का योगदान करता है और देश की निर्यात आय में भी सहयोग करता है, लेकिन इस कारीगरी की महानता से अभी भी लोग अनजान हैं। हथकरघा उद्योग केवल भारत का गौरव ही नहीं है, बल्कि देश में सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार का एक स्रोत भी है।


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