बहादुर महिला ने जान जोखिम में डालकर आग की चपेट में आए 12 बच्चों को दिया जीवनदान

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Updated on 28 Apr, 2016 at 2:11 pm

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उत्तराखंड में कोटद्वार स्थित भाबर क्षेत्र के खड्डापानी में गुर्जरों के डेरे के आग की चपेट में आने पर गुर्जर महिला जैतुन की बहादुरी के चर्चे आसपास सभी इलाकों में हो रहे हैं। दरअसल, जैतुन ने अपनी जान की परवाह न करते हुए डेरे में आग से बेखबर सो रहे बारह बच्चों और एक बुजुर्ग महिला की जान बचाई।

हालांकि, इस अग्निकांड में जैतून ने पाई-पाई इकट्ठा करके बनाए अपने घर को राख में खो दिया है। फिर भी उसको इस बात का दिलासा है कि वह 12 मासूम बच्चों को बचाने में सफल रही।

घटना कुछ दिन पहले की है। उस रोज सुबह के करीब ग्यारह बजे थे। जैतून डेरे में स्थित झोपड़ी में अपने एक वर्षीय बेटे रिफाकत को सुलाने की कोशिश कर रही थी। तभी उसने झोपड़ी की छत पर नजर दौड़ाई, तो उसके होश उड़ गए। छत आग की लपटों से घिरी हुई थी।

बिना एक पल भी गंवाए जैतून अपने बेटे को पीठ पर बांध कर बाहर की तरफ दौड़ी। बाहर निकलकर उसने अपनी देवरानी नूर बेबी को आवाज लगाई और नूरबेबी की मदद से डेरे में आग में फंसे बारह बच्चों को बाहर ले निकलने में सफल हो गई।


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थोड़ी ही देर में आग ने पूरे डेरे को अपनी आगोश में ले लिया था। इसी दौरान उसे डेरे में रह रही 101 वर्षीय वृद्ध महिला नूरा की याद आई और वह फिर डेरे में उन्हें बचाने चली गई।

आग अब बुरी तरह से फ़ैल चुकी थी, लेकिन जैतून ने नूरा को सहारा देकर बाहर निकाल लिया और आग में जलने से बचा लिया। यही नहीं, जैतून ने डेरे में बंधी भैंसों की रस्सियां काटकर उन्हें जंगल की तरफ दौड़ा दिया।

अग्निकांड के बाद उनके पास शरीर पर पहने कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा है। लेकिन इस बात का सुकून भी है कि अगर थोड़ी भी उन्होंने लापरवाही दिखाई होती, तो बच्चों की जान को नुकसान हो सकता था।

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