ड्राइवर के बेटे के दिल में था छेद, मालकिन ने 25 लाख रुपये जोड़कर करवाया ऑपरेशन

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Updated on 2 Jan, 2017 at 6:23 pm

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इस दुनिया में इंसानियत से बड़ा शायद ही कोई कर्म है। यहां हम जिस एक शख्स के बारे में बात करने जा रहे हैं, उन्होंने अपने नेक काम से समाज के समक्ष एक मिसाल कायम की है।

हुआ कुछ यूं कि 6 साल के नन्हे आदित्य शिंदे के बचपन से ही दिल में छेद था और इस वजह से वह चल भी नहीं पाता था। चलते ही उसकी सांसें फूलने लगती थी। आदित्य के इलाज का खर्च बहुत अधिक था। पहले दो बार ऑपरेशन हो चुका था, लेकिन वे दोनों ही असफल रहे।

आदित्य के पिता रुपेश शिंदे ड्राइवर के रूप में काम करते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वह अपने बच्चे के इलाज का खर्च उठा सकते थे।

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 सालों से श्रीराम परिवार के यहां बतौर ड्राइवर नौकरी करने वाले आदित्य के पिता की परेशानी के बारे में, जब परिवार की एक सदस्य मीना श्रीराम को पता चला, तो उन्होंने इलाज में लगने वाले 25 लाख रुपयों का इंतजाम एक हफ्ते के अंदर कर लिया।

स्रोत से बातचीत में आदित्य के पिता ने कहाः


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“जब मेरा बेटा मुझसे पूछता कि वह बाकी बच्चों की तरह कब चल सकेगा, तो मैं समझ नहीं पाता कि उसे क्या जवाब दूं। मैं मीना श्रीराम के यहां ड्राइवर का काम करता था। उन्होंने और चेन्नई के डॉक्टर्स ने मिलकर उस समय मेरी मदद की जब मैं सारी उम्मीदें हार चुका था। मीनाजी ने मुझसे मेरी उदासी का कारण पूछा। जब मैंने उन्हें अपनी परेशानी बताई, तो उन्होंने अपने दोस्तों से संपर्क कर एक हफ्ते के अंदर 25 लाख रुपयों का इंतजाम कर लिया। उन्होंने मुझे बेटे का इलाज कराने के लिए जबरन चेन्नई भेजा।”

वहीं मुम्बई में एक वित्तीय सलाहकार के रूप में कार्यरत मीना महाजन कहती हैंः

“सबसे अहम बात है कि पैसों का इंतजाम हो गया। मेरे दोस्तों और क्लाइंट्स ने मदद की। मैंने रूपेश से कहा कि हार मानना आसान है। मैंने फिर उसे चेन्नई भेजा। उसके साथ एक दोस्त भी गया, ताकि उसे भाषा समझने में कोई परेशानी न हो। आदित्‍य की कहानी बताती है कि सब संभव है। उसकी मदद में सबने सहयोग दिया। मेरे दफ्तर में काम करने वाले एक शख्‍स ने जिसकी तनख्‍वाह 25 हजार रुपए है, ने 5000 रुपए का चेक दिया।”

चेन्‍न्‍ई के फॉर्टिस मलार अस्‍पताल में आदित्य का हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। इसके लिए सिकंदराबाद से चेन्‍नई एक हृदय भेजा गया, जिसे आदित्‍य को लगाया गया। सात घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद अब आदित्य के लिए स्थितियां सामान्य हो रही हैं।

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