बिना कुछ खाए-पिए 77 साल से योग के बल पर जिन्दा हैं प्रहलाद जानी, विज्ञान के लिए पहेली हैं बाबा

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Updated on 14 Jun, 2017 at 6:15 pm

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गुजरात के मेहसाणा जिले में रह रहे 85 वर्षीय प्रहलदजी उर्फ माताजी चुनरी वाले जीते जागते चमत्कार हैं। वह योग की साधना करते हुए पिछले 77 साल से बिना कुछ खाए-पिए जीवित हैं। यहां तक कि उन्होंने दैनिक क्रियाओं को भी योग की शक्ति से नियंत्रित कर रखा है। अपनी इस चमत्कारिक साधना की वजह से प्रहलादजी चिकित्सा विज्ञान के लिए एक चुनौती बन गए हैं। लोगों का दावा है कि प्रहलाद जानी ने 7 साल की उम्र में आध्यात्म की तलाश में अपना घर त्याग त्याग दिया था और 1940 से वे हवा के दम पर जीवित हैं।

मां दुर्गा की आराधना करने वाले प्रहलाद जानी के बारे में यह प्रचलित है कि पिछले 77 वर्षों के दौरान न तो उन्होंने अन्न का एक दाना और न ही पानी की एक बूंद को मुंह में लिया है।

भारत साधुओं और साधकों का देश हैं। ऐसे साधक जो अपने ईष्ट की साधना कर अपने चमत्कार से दुनियां को आश्चर्यचकित करते रहते हैं। प्रहलाद जानी स्वयं कहते हैं कि यह तो दुर्गा माता का वरदान है।

“मैं जब 12 साल का था, तब कुछ साधू मेरे पास आए। कहा, हमारे साथ चलो, लेकिन मैंने मना कर दिया। करीब छह महीने बाद देवी जैसी तीन कन्याएं मेरे.पास आईं और मेरी जीभ पर अंगुली रखी। तब से ले कर आज तक मुझे न तो प्यास लगती है और न भूख।”

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साधकों के द्वारा जो चमत्कार किए जाते हैं उसका जवाब विज्ञान के पास भी नहीं होता।

पिछले 77 सालों से भूखा-प्यासा रहने का दावा करने वाले प्रहलाद जानी पर डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की टीम कई स्टडी कर चुकी है। लेकिन काफ़ी रिसर्च के बाद भी विज्ञान और आध्यात्म के बीच फंसी यह पहेली सुलझने के बजाय और उलझती ही नज़र आ रही है।

प्रहलाद जानी के दावों में कितनी सच्चाई है, यह जानने के लिए रक्षा विभाग के डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की एक टीम ने 15 दिन का ऑपरेशन भूख शुरू किया था। इस ऑपरेशन के अंतर्गत प्रहलाद जानी को 24 घंटे सीसीटीवी की निगरानी में रखा गया। यहां तक कि नहाने और ब्रश करने के लिए भी पानी पहले से ही नापतौल कर दिया जाता रहा। हर आधे से एक घंटे में प्रहलाद जानी को फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, गेस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट,एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबिटोलॉजिस्ट, यूरो सर्जन, आंख के डॉक्टर और जेनेटिक के जानकार डॉक्टरों की टीम के जरिये चेक किया जाता रहा और उनकी रिपोर्ट तैयार की जाती रही। 15 दिन लगातार मॉनिटिरिंग के बाद वैज्ञानिक हैरान हैं। प्रहलाद अपने दावे में अभी तक खरे उतरे हैं।



प्रहलाद जानी पर रिसर्च के दौरान डॉक्टरों को ये बात माननी पड़ी कि इनके शरीर में कुछ तो ऐसा होता है, जो इन्हें ताकत देता है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर शाह का कहना हैः

“ध्यान और योग के कारण उनके शरीर ने खुद को इस रूप में ढाल लिया है, जिसके कारण वो इतने लम्बे समय से बिना कुछ खाए-पिए इतने स्वस्थ हैं”

इतना ही नहीं रिसर्च कर रही टीम के पास यह भी जवाब नही है कि प्रहलाद जानी मल-मूत्र त्यागने जैसी दैनिक क्रियाओं को योग के जरिए कैसे नियंत्रित कर लेते हैं। सुधीर शाह बताते हैं कि जानी के ब्लैडर में मूत्र बनता है, लेकिन कहां गायब हो जाता है इसका पता करने में विज्ञान भी अभी तक विफल ही रहा है।

डॉक्टरों का मानना है कि कोई भी वयस्क व्यक्ति बिना खाना खाए 30 से 40 दिन तक जीवित रह सकता है। लेकिन बिना पानी के पांच दिन से ज्यादा जिन्दा रहना सम्भव ही नहीं है। ऐसे में प्रहलाद जानी विज्ञान जगत के लिए एक चुनौती बने हुए हैं। प्रहलाद जानी भारतीय योग की शक्ति के अभिन्न उदाहरण हैं।


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