अवैध तरीके से घुसे रोहिंग्या मुसलमानों को कैसे वापस भेजेगा भारत?

Updated on 22 Sep, 2017 at 1:12 pm

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इन दिनों बांग्लादेश से लेकर, म्यांमार और भारत तक बस एक ही मुद्दा छाया हुआ है और वह है रोहिंग्या शरणार्थियों का। म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों को खदेड़ा जा रहा है, जिसकी वैश्विक स्तर पर आलोचना भी हो रही है। इधर, भारत ने भी देश की आंतरिक सुरक्षा को देखते हुए हुए गैरकानूनी रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने की बात कही है। सरकार ने इन्हें वापस भेजने की बात तो कह दी, लेकिन उन्हें किस तरह से वापस भेजना है, यह खुद सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक देश में फिलहाल करीब 40 हजार रोहिंग्या गैर कानूनी तरीके से रह रहे हैं। अक्सर इन लोगों के आतंकवादियों से संबंध होने की बात होती रही है और यही वजह है कि सरकार अब रोहिंग्या मुसलमानों को देश में नहीं रखना चाहती। दरअसल, म्यांमार में हिंसा फैलने के बाद रोहिंग्या मुसलमानों ने भारत, थाईलैंड, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल समेत कई देशों में गैर कानूनी रूप से अपना बसेरा बसा लिया और कोई भी देश इन्हें वापस नहीं भेज सका है सिवाय थाईलैंड के।

कैसे वापस भेजा था थाईलैंड ने


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थाईलैंड ने 2014 में रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने का आदेश दिया था और इस आदेश के बाद करीब 1300 लोगों को वापस भेज दिया गया। दरअसल, थाईलैंड ने रोहिंग्याओं को अपनी मर्जी से वापस जाने की छूट दे दी थी। थाइलैंड के एक अधिकारी के मुताबिकः ‘’रोहिंग्या थाईलैंड में अपना भविष्य नहीं देखते हैं, इसीलिए हमने उन्हें वापस भेज दिया।”.



क्यों म्यांमार से भागने पर मजबूर है रोहिंग्या?

वर्ष 2012 में म्यांमार के रखाइन प्रान्त में रोहिंग्या आतंकी समूह ने कई सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी थी। इसके बाद से रोहिंग्या और मूलनिवासी बौद्धों के बीच व्यापक दंगे भड़क गए। इस वाकये के बाद से ही म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा जारी है और मजबूरी में उन्हें अपना देश छोड़कर भागना पड़ रहा है।

अब देखना ये होगा कि भारत अवैध तरीके से घुस आए रोहिंग्या मुसलमानों से कैसे निजात पाता है?


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