आखिर अनंत चतुर्दशी के दिन ही क्यों किया जाता है गणपति विसर्जन?

Updated on 7 Sep, 2017 at 8:21 pm

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त्योहारों की धूम जितनी भारत में होती है उतनी दुनिया के किसी देश में नहीं होती। भारतीय हर त्योहार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं और इन्हीं त्योहारों के ज़रिए जीवन में खुशी भी तलाशते हैं। गणेश उत्सव के साथ ही त्याहारों की धूम शुरू हो जाती है। 10 दिनों तक चलने वाला महाराष्ट्र का यह खास उत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की मूर्ति के विसर्जन के साथ ही समाप्त हो जाता है।


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क्या कभी आपने सोचा है कि कलाकार महीनों इतनी मेहनत करके गणेश जी की सुंदर-सुंदर मूर्तियां बनाते हैं तो आखिर उन्हें पानी में क्यों प्रवाहित किया जाता है? दरअसल, गणेश प्रतिमा के विसर्जन का पौराणिक ग्रंथों में जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी के दिन से भगवान श्री गणेश को महाभारत की कथा सुनानी शुरू की थी। लगातार दस दिन तक वेदव्यास जी श्री गणेश को कथा सुनाते रहे और गणेश जी कथा लिखते रहे। कथा पूर्ण होने के बाद महर्षि वेदव्यास ने आंखें खोली तो देखा कि अत्यधिक मेहनत करने के कारण गणेश जी का तापमान बढ़ा हुआ है। गणेश जी के शरीर का तापमान कम करने के लिए वेदव्यास जी नजदीक के सरोवर में गणेश जी को ले जाते हैं और स्नान कराते हैं। अनंत चर्तुदशी के दिन गणेश जी के तेज को शांत करने के लिए सरोवर में स्नान कराया गया था, इसलिए इस दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने का चलन शुरू हुआ।

विसर्जन का दूसरा कारण है पृथ्वी के प्रमुख पांच तत्त्वों में गणपति को जल का अधिपति माना गया है, इस कारण भी लोग गणपति को जल प्रवाहित करते हैं।

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