सऊदी अरब में संकट, 8 लाख प्रवासी मजदूरों ने छोड़ दिया देश

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9:50 am 16 Jul, 2018

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सऊदी अरब में बढ़ती बेरोज़गारी और तेज़ी से गिरती अर्थव्यवस्था की वजह से वहां रह रहे हज़ारों की तादाद में प्रवासी श्रमिकों को राज्य से पलायन करना पड़ रहा है। प्रवासियों के सऊदी छोड़ने के पीछे क्राउन प्रिन्स मोहम्मद बिन सलमान के विज़न 2030 को माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य सऊदी के हर विभाग से प्रवासी कर्मचारियों की निर्भरता खत्म करना है और सिर्फ सऊदी नागरिकों को ही रोज़गार देना है।

विदेशी समाचार एजेंसी के अनुसार विश्व की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था बाज़ार को इस साल धीमी शुरुआत मिली, जिसका असर सबसे ज़्यादा प्रवासी श्रमिकों पर पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 की पहली तिमाही के अंत तक 7 लाख से अधिक विदेशी श्रमिक सऊदी अरब के स्थानीय बाजार को छोड़ चुके हैं।

 

2017 से अब तक 7.2 लाख विदेशियों ने सऊदी अरब छोड़ दिया है।

 


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आकड़ों के अनुसार पहली तिमाही में हुए भारी गिरावट के कारण सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को निर्माण क्षेत्र, कम-लागत वाले श्रमिक क्षेत्र के साथ-साथ ट्रेड और मैनुफेक्चरिंग क्षेत्र पर बुरा प्रभाव पड़ा है, जिसका सीधा असर रोजगार पर पड़ा है।

 

 

आर्थिक और बेरोजगारी संकट से गुजर रहा है सऊदी अरब

 

सऊदी नागरिकों को भीषण बेरोज़गारी संकट से गुज़रना पड़ रहा है। इस वजह से वहां के नागरिकों को रोजगार तलाशने में काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। सऊदी अर्थव्यवस्था 2018 की पहली तिमाही के अंत तक बेरोजगारी दर 12.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं, 1.07 लाख सऊदी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। प्राप्त आकड़ों के अनुसार सऊदी अरब में बेरोजगारी दर पुरूषो मे 7.6 प्रतिशत और महिलाओ मे 30.9 प्रतिशत तक बढ़ी है।

 

 

सऊदी क्राउन प्रिन्स मोहम्मद बिन सलमान के विज़न 2030 की प्राथमिकता तेल पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है, जिसके लिए उन्हें अपने नागरिकों के लिए नये रोज़गार के अवसर प्रदान करने होंगे। इसके लिए सरकार ने एक नेशनल ट्रॅन्स्फर्मेशन प्रोग्राम चलाया है, जिसके अंतर्गत 2020 तक बेरोजगारी दर को 9 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है।

 

 

‘सऊदीकरण’ की नीति के कारण प्रवासी श्रमिकों को करना पड़ रहा है पलायन

 

क्राउन प्रिन्स मोहम्मद बिन सलमान के तथाकथित ‘सऊदीकरण’ की नीति के कारण प्रवासी श्रमिकों के पलायन तेज़ हो गया है, जो आबादी का एक तिहाई हिस्सा हैं। इस प्रक्रिया में दूसरे देश से रोज़गार की तलाश में आए विदेशियों को सरकार पर निर्भर रहने के लिए फीस चुकानी पड़ती है। इसके अलावा गैर-सऊदी कंपनियों पर अलग से टेक्स लेवी को बढ़ा दिया गया है। इतना ही नहीं, जिन क्षेत्रों में सऊदी अरब के नागरिक काम कर सकते हैं, उन्हें प्रवासियों के लिए प्रतिबंधित कर दिया जा रहा है।

सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था 2009 केआर्थिक मंदी के बाद से सबसे खराब वित्तीय दौर से गुजर रही है। इकोनॉमिक रिसर्च एट दी गल्फ रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर जॉन सफाकिआनाकिस बताते हैं कि, चूंकि राज्य पिछले साल की मंदी से उभर रहा है इसलिए आर्थिक सुधार पर ज़ोर दिया जा रहा है। इस वजह से रोज़गार निर्माण के प्रयास पीछे छूट जा रहे हैं।

 

 

आकड़े बताते हैं कि 2018 के पहले तीन महीनों के दौरान 234.2 हजार प्रवासी श्रमिकों को सऊदी अरब छोड़ना पड़ा है।


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