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समस्त भाषाओं की जननी संस्कृत का महत्व समझाने के लिए इस जोड़े ने अपनाया अनोखा तरीका

Published on 17 February, 2018 at 6:59 pm By

आजकल लोग अपनी शादी को स्पेशल बनाने के लिए कई तरह के आइडियाज अपनाते हैं, जिससे उनकी जिंदगी का यह खास पल और यादगार बन जाए। ऐसे ही अपनी शादी को ख़ास बनाने के लिए एक जोड़े ने कुछ अलग करने का सोचा।


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किसी भी शादी का अहम भाग होता है शादी का कार्ड। शादी के कार्ड को लेकर भी लोग एक्ससिटेड रहते हैं। ऐसे में इस जोड़े ने न केवल अपना शादी का कार्ड अलग तरह से छपवाने का सोचा, बल्कि शादी के अन्य कार्यक्रम भी अलग तरह से करने का फैसला किया।

 

जब भी आपके घर शादी का कार्ड आता है वो या तो हिंदी भाषा में होता है या फिर अंग्रेजी में होता है। लेकिन यहां इस जोड़े ने एक ऐसी भाषा में अपना कार्ड छपवाया जिसे सब भाषाओं का जननी कहा जाता है। लेकिन अब आधुनिक होते वक़्त के साथ ये भाषा युवाओं के बीच अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही है।

यहां हम बात कर रहे हैं संस्कृत भाषा की। संस्कृत से दूर भागती युवा पीढ़ी को समस्त भाषाओं की जननी संस्कृत का महत्व समझाने का बीड़ा मेरठ शहर के दो युगल ने उठाया है।

 

 

संस्कृत शिक्षक अर्जुन व मीनाक्षी ने अपने विवाह में केवल मंत्रोच्चारण नहीं, बल्कि स्वागत, मेन्यू, प्लेकार्ड्स भी संस्कृत भाषा में ही रखे। दोनों 16 फरवरी को विवाह बंधन में बंधे।

 

इस शादी के निमंत्रण पत्र तो संस्कृत में थे ही, साथ ही विवाह स्थल पर अन्य सभी कार्य भी संस्कृत भाषा के उपयोग के साथ संपन्न हुए।



 

 

अर्जुन संस्कृत भारती के प्रचारक व निजी विद्यालय में संस्कृत शिक्षक हैं। बनारस संपूर्णानंद विवि से शास्त्री की शिक्षा लेकर मेरठ कॉलेज से अर्जुन ने एमए किया। उनके मित्र नील कमल ने यह रिश्ता तय कराया। निजी विद्यालय में संस्कृत की शिक्षिका मीनाक्षी नीलकमल की छात्रा हैं। संस्कृत को तवज्जो देने के अपने इस निर्णय पर अर्जुन कहते हैं-

“संस्कृत महज एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कार है। हमारी संस्कृति का अंग है। इसलिए हमने तय किया कि हम संपूर्ण विवाह कार्यक्रम संस्कृत में संपन्न कराएंगे। वर-वधू के इस निर्णय को दोनों परिवारों ने सराहा।”

 

 


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वेसै तो हम सभी मानते हैं कि संस्कृत को यूं तो देव भाषा होने का गौरव प्राप्त है, लेकिन भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा रही इस भाषा का उपयोग कम होता जा रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस जोड़े ने यह आयोजन संस्कृत में कराने का निर्णय लिया। इसके पीछे मकसद सिर्फ इतना था कि संस्कृत भाषा के उपयोग को जीवन में शामिल किया जाए, ताकि संस्कृत को प्रचार-प्रसार मिले।

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