अफगानिस्तान में अमेरिका का मकसद आंतक का खात्मा या अफीम के व्यापार से कमाई?

Updated on 31 Aug, 2018 at 5:52 pm

तालिबान और आतंकियों के खात्मे के लिए अमेरिका काफी समय से अफगानिस्तान में डेरा जमाया हुआ है। खबर है कि दो दिन पहले भी अमेरिकी फौज ने तालिबानियों पर हवाई हमले किए थे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अक्सर आतंकवाद के खात्मे की बात दोहराते रहते हैं, लेकिन अफगानिस्तान में बढ़ती अमेरिकी फौजों की संख्या कुछ और इशारा भी करती है।

 

दरअसल, अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जाती हैं। ऐसे में जानकारों का मानना है कि अफगानिस्तान पर लगातार हमला करने के पीछे अमेरिका का मकसद सिर्फ आतंकवाद का खात्मा ही नहीं, बल्कि नशे के कारोबार को बढ़ाना भी हो सकता है।

अफगानिस्तान में अफीम की खेती में कई गुणा इज़ाफा हुआ है और उधर अमेरिका में इसकी कमी है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका अपनी इस कमी को अफगानिस्तान से पूरी कर सकता है। वैसे भी अफगानिस्तान और ईरान में नशे के कारोबार को गुपचुप तरीके से अमेरिका ही बढ़ावा दे रहा है। कहा जाता है कि तालिबान अफीम का सबसे बड़ा डीलर है, तो अमेरिका अफीम की खेती को आर्थिक मदद देकर बढ़ावा दे रहा है। कहीं न कहीं वो इसमें अपना फायदा देख रहा है।

हाल ही में ट्रंप ने अफगानिस्तान पर नई अमेरिका नीति की घोषणा करते हुए सबसे इसमे सहयोग देने को कहा है। इस नई नीति के तहत अफगानिस्तान में 4000 सैनिक और तैनात किए जाएंगे।

अमेरिका अफगानिस्तान पर हमले को हमेशा आंतकवाद सो जोड़ता है, लेकिन इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि उसकी नज़र वहां के अफीम व्यापार है। फिलहाल अफीम का व्यापार 70 बिलियन डॉलर का है और ये लगातर बढ़ रहा है।

यह आशंका इसलिए भी व्यक्त की गई है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान में नशा विरोधी अभियान पर अब तक 8.4 बिलयन डॉलर खर्च किए हैं, इसके बावजूद अफीम की पैदावार पर कोई असर नहीं हुआ है। करीब 15 साल पहले दुनिया के कुल अफीम उत्पादन का 70 फीसदी अफगानिस्तान में उपजता था। अब भी क्रमशः वही हालात हैं।



इस रिपोर्ट में कहा गया हैः

“अमेरिका ने अब तक अफगानिस्तान में चल रहे अपने मिलिट्री अभियानों पर 700 मिलीयन खर्च किए हैं, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि अफीम के उद्योग को संरक्षण देकर अमेरिका ने इससे कहीं अधिक मुनाफा कमाया है।”

इन तस्वीरों में नाटो के सैनिकों को अफीम के खेतों की रखवाली करते देखा जा सकता है।

 

 

तो क्या वाकई अमेरिका ने अफीम से कमाई के लिए अफगानिस्तान में डेरा जमा रखा है?

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