वृंदावन चंद्रोदय मंदिर होगा दुनिया में सबसे ऊंचा

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Updated on 7 Jan, 2016 at 12:09 pm

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84 कोस में फैले ब्रज मंडल की आभा शोभनीय है, तो ब्रज के हृदय स्वरूप वृंदावन का सौंदर्य मनमोहक है। नंदनगरी वृंदावन का रज-रज धाम है। यहां राधावल्लव कुंजबिहारी श्री गोविंद बांकें बिहारी भगवान श्री कृष्ण स्वयं विराजमान हैं। यह पवित्र भूमि नटखट बाल गोपाल कान्हा की साक्षी है।कहते हैं कि मुरलीमनोहर के सुंदर दिव्य चरण जहां-जहां पड़े वह स्थल तीर्थ स्थल हो गया।

वृंदावन ब्रज-गोपियों की भूमि है। यहां के कण-कण से, पुष्प पौधों से प्रेम वर्षा होती है। यहां की गली-गली से राधा नाम की गूंज निकलती है। उसका श्रवण करना, इस प्रेम नाम का रसपान करना, भागवत कथा सुनने के बराबर है।

ब्रज की दिव्य श्रृंगार करने वाली पावन प्रयाग यमुना की एक कथा है। कहते हैं की यमुना जब समस्त जीव जंतुओं के पाप ग्रहण कर लेती है, तो वह वृंदावन आकर प्रयाग-राज बन यहां के दिव्य रज में लोट-लोट कर अपने पापों से मुक्त होती है।


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ब्रज की लीला ब्रज ही जाने। प्रभु की इन्हीं लीलाओं से अवलोकन कराने के लिए ब्रजमंडल के बीचो-बीच प्रस्तावित है वृंदावन चंद्रोदय मंदिर। इस मंदिर की ऊंचाई 70 मंजिली इमारत के बराबर होगी। आने वाले समय में यह विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर होने का गौरव प्राप्त कर लेगा।

वृंदावन चंद्रोदय मंदिर की ऊंचाई लगभग 213 मीटर होगी और इसके निर्माण में लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत आएगी।



62 एकड़ में फैले इस मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए एक हेलीपैड और आवास सुविधाओं भी मौजूद होंगी। इसके साथ ही साल भर इस मंदिर में भक्ति कार्यक्रमों के साथ -साथ सांस्कृतिक उत्सवों के पवन मेले देखने को मिलेंगे।

प्रतिष्ठित मंदिर ‘ वृंदावन चंद्रोदय मंदिर ‘ का निर्माण इस्कॉन करा रहा है। राधा रानी की पवित्र भूमि वृन्दावन की छटा और भी देखने योग्य होगी।

वृन्दावन, मथुरा भगवान कृष्ण की लीला से जुड़ा हुआ है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार उनके अनेको प्रसंग ब्रज के जंगलों में रमे हुए हैं। इसलिए लगभग तीस एकड़ जमीन पर ये जंगल पुनः जीवित किए जाएंगे। इस मंदिर का वास्तुशिल्प भी किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।

ब्रज के केन्द्र में स्थित वृन्दावन में सैकड़ों मन्दिर हैं, जिनमें से अनेक ऐतिहासिक धरोहर भी है। यहां सैंकड़ों आश्रम और कई गौशालाएं हैं। गौड़ीय वैष्णव, वैष्णव और हिन्दुओं के धार्मिक क्रिया-कलापों के लिए वृन्दावन विश्वभर में प्रसिद्ध है। परंतु इस मंदिर के निर्माण पूर्ण हो जाने के बाद देश से पर्यटक और तीर्थ यात्रियों की संख्या में और भी बढ़ोतरी होगी।


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