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आँखों से अक्षम बेटी जब बैंक अधिकारी बन कर लौटी तो गाँव में जश्न का माहौल

Published on 7 May, 2016 at 11:48 am By

कुदरत ने भले ही उसे आंखों से अक्षम बनाया, लेकिन हर परिस्थितियों से लड़ने का हौसला भी दिया। वो ज़रूर एक पिछड़े, गरीब और आदिवासी इलाके से है। लेकिन इन्ही विपरीत हालातों ने उसे वो ताक़त दी, जिसमें तप कर उसे और निखरना था। आज उसकी प्रतिभा की आभा चारों ओर प्रकाश फैला रही है। आज इस बेटी पर सबको नाज़ है। उसकी कहानी एक बेहतरीन मिसाल है।

आंखों से अक्षम शारदा की कहानी मध्यप्रदेश के इंदौर के अलीराजपुर जिले से एक आदिवासी इलाके से शुरू होती है। एक ऐसा इलाका जो शिक्षा के लिहाज से पिछड़ा, और जहाँ साक्षरता दर न के बराबर है। संसाधनों और आंखों की रौशनी का अभाव किसी भी आम आदमी के सपनों को तोड़ने के लिए काफ़ी हैं। पर जब यह बेटी एक बैंक अधिकारी बन कर लौटी तो वो आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गयी।

शारदा को बैंक ऑफ इंडिया में बतौर बैंक पीओ (प्रमाणीकरण अधिकारी) की नौकरी मिल गई है।


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इतना ही नही शारदा डावर ने वो कर दिखाया जिसके बारे में कोई सोच भी नही सकता। दरअसल उसे जिला कलेक्टर से 10000 रुपयों की मदद प्राप्त हुई थी। ताकि वो अपनी पढ़ाई पूरी कर सके। बैंक में चुने जाने के बाद उसने खुद जा कर वो रुपये चुका दिए। ऐसी उदार भावना से लबरेज़ शारदा ने कलेक्टर को धन्यवाद देते हुए कहा:

“ये पैसे आप ले लो, इनसे किसी और जरूरतमंद की मदद कर दीजिएगा”

पढ़ाई पूरी करने के लिए नही थे पैसे



कंदा गांव की रहने वाली शारदा के संघर्ष की कहानी अब हर किसी के जुबान पर है। लेकिन उसकी ज़िंदगी में ऐसा भी मोड़ आया था जब उसके पास पैसों की बदहाली थी। उसके आगे की पढ़ाई करना सिर्फ़ ख्वाब सा प्रतीत हो रहा था। उसने इलाके के कलेक्टर से मदद की गुहार की। अलीराजपुर के कलेक्टर शेखर वर्मा भगवान साबित हुए। उन्होंने शारदा की मदद की, जिसके फलस्वरूप आज उसने सफलता की एक नई कहानी कह दी।

बधाइयों का लगा तांता, गाँव में जश्न का माहौल।

प्रशासन की योजना के अंतर्गत 10,000 रुपए की आर्थिक मदद पाकर इस मुकाम पर पहुंचने वाली शारदा के गाँव में जश्न का माहौल है। यही नही शारदा की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। उसे लोगों से खूब सराहना मिल रही है। झोबाट आदिवासी इलाके के नेता राजेश भील का कहना है कि शारदा की कामयाबी का जश्न जोर-शोर से मनाया जाएगा।


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तीन बहनों एक भाई में सबसे बड़ी 24 वर्षीय शारदा गरीब पिता राय सिंह की बेटी है। शारदा की कहानी यह प्रेरणा देती है कि अगर आपमें आत्मविश्वास है तो विषम परिस्थितियों में जीवन की कठिनाइयों से भी लड़ा जा सकता है। और तो और उसने जो साहस और आत्मसम्मान का परिचय दिया है, वह पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

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