दिव्यांगों के लिए अनुकूल नहीं है भारतीय रेल, इस लड़की ने लिखा PM माेदी और रेलमंत्री प्रभु के नाम खुला खत

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Updated on 9 Feb, 2017 at 9:55 pm

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भारतीय रेल में यात्रा करना जितना रोमांचक होता है, उससे अधिक सफर के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ट्रेनों के समय से न चलने, शौचालय के गंदे होने तथा ट्रेन में बेहतरीन भोजन की व्यवस्था को लेकर यात्रियों की कई तरह की शिकायतें होती हैं।

अब आप सोचिए जहां यात्रियों को इस तरह की मूलभूत सुविधाओं की दिक्कतों का सामना करना पड़ता हो, वहां दिव्यांगों को कितनी परेशानी होती होगी।

कुछ सालों पहले मरकर फिर जिंदा होने के कारण सुर्खियों में छाई भारतीय मूल की अमेरिकन मॉडल विराली मोदी का प्रधानमंत्री मोदी को लिखा खुला खत वायरल हो रहा है। इस खत में विराली ने रेलवे स्टेशन और बाकी सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान न किए जाने के मुद्दे पर अपनी बात रखी है।

virali modi

विराली मोदी

मोटिवेशनल स्पीकर, लेखिका, मॉडल विराली ने अपनी दिव्यांगता को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। विराली ने पिछले साल हुए मिस व्हीलचेयर ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया, जहां वे रनर-अप रहीं। मुम्बई में रह रही विराली को घूमना बेहद पसंद है, लेकिन हाल ही में भारतीय रेल में सफर करने के दौरान जो उनके साथ जो कुछ भी हुआ, उससे वह आहत हैं।


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Change.org पर डाली गई अपनी एक ऑनलाइन पेटिशन पर विराली मोदी ने उन तीन मौकों का जिक्र किया है, जब उन्हें कुलियों द्वारा अनचाहे स्पर्श और एक तरह के अपमान का सामना करना पड़ा। जैसा की हम जानते हैं कि भारतीय ट्रेनों में व्हीलचेयर से सबंधित सुविधाएं नहीं हैं, ऐसे में उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसी ही एक परेशानी का जिक्र करते हुए विराली बताती हैं:

“मुझे डाइपर पहनना पड़ा, क्योंकि मैं ट्रेन का बाथरूम इस्तेमाल नहीं कर सकती थी। और जब मुझे उस डाइपर को बदलने की जरूरत हुई, तो  वहां कोई प्राइवेसी नहीं थी और फिर मुझे घंटों तक डाइपर बदलने के लिए रात होने का और लाइट्स के बंद होने का इंतज़ार करना पड़ा।”



विराली की शिकायत है कि रेलवे, दिव्यांगों के साथ ‘किसी सामान’ की तरह पेश आता है।

आपको बता दें कि 2016 के दिसंबर में पास हुए दिव्यांगों के लिए बनाए गए राइट्स ऑफ पर्संस विद डिसेबिलिटी बिल के अनुसार, सभी सार्वजनिक स्थल, जिनमें रेलवे स्टेशन भी शामिल हैं, पर दिव्यांग लोगों के लिए सुविधाएं होनी ज़रूरी है।

इस बिल के अन्तर्गत बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर दिव्यांग लोगों के लिए सुविधाएं होनी चाहिए। पार्किंग की जगह, शौचालय, तत्काल काउंटर और टिकट वेंडिंग मशीन तक में दिव्यांगों की सुविधा का ख्याल रखा जाना चाहिए, लेकिन इनमें से किसी भी नियम का पालन सख्ती से नहीं होता।

अब विराली की सरकार से कुछ मांगे हैं:

  1. ट्रेन में बड़ा बाथरूम होना चाहिए, जो साफ और ऊंचा हो। सिंक थोड़े नीचे होने चाहिए ताकि दिव्यांग आसानी से हाथ धो सकें।
  2. हर ट्रेन में दिव्यांगों के लिए ऐसे कोच होने चाहिए, जिनमें वे आसानी से चढ़ सकें, वैसे तो हर क्लास का एक कोच उनकी ज़रूरत के हिसाब से होना चाहिए। सीटों के बीच जगह होनी चाहिए जिससे व्हीलचेयर बीच में आ सके। ताकि अगर व्यक्ति को एक सीट से दूसरी सीट पर जाना हो तो जा सके।
  3. अगर प्लेटफार्म को बदलने की जरूरत हो तो रेलमार्ग को पार करने के लिए उचित इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए।
  4. विराली आगे कहती हैं कि अक्सर उन्हें कई बार कपड़े चेंज करने की जरूरत होती है, लेकिन सीटें छोटी होने के कारण वह चेंज नहीं कर पाती। इसके साथ ही प्राइवेसी भी नहीं है। ऐसें में बर्थ में परदे की सुविधा होनी चाहिए।

इस पेटिशन में अब तक 63,500 से ज्यादा लोगों ने दस्तख्वत किए हैं। विराली मोदी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या रेलमंत्री सुरेश प्रभु के साथ बैठकर निजी तौर पर इस मुद्दे पर अपनी मांगों को लेकर बात करना चाहती हैं।


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