जब टाइटैनिक डूब रहा था तब संगीतकार धीरज बनाए रखने के लिए इस वायलिन को बजा रहे थे

Updated on 24 May, 2017 at 6:26 pm

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डूबते हुए जहाज़ में आखिरी बार अपने साथियों के साथ वायलिन बजाने वाला दृश्य वर्ष 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म टाइटैनिक के कई भावुक दृश्यों में से एक है। एक ज्ञात तथ्य यह भी है कि ऐसा सच में हुआ था। अंग्रेजी वायलिन वादक वाल्लस हार्टले अपने बैंड के आठ संगीतकारों के साथ आरएमएस टाइटैनिक में सवार थे। उनका काम था जहाज़ में सवार यात्रियों का संगीत से मनोरंजन करना और उन्होंने यह काम बखूबी किया भी।

15 अप्रैल 1912 को उत्तरी अटलांटिक महासागर में जब टाइटैनिक जहाज़ बर्फ की चट्टान से टकराकर डूब रहा था तब वाल्लस हार्टले अपने बैंड के साथ यात्रियों को शांत रखने के लिए वायलिन बजा रहे थे। अंत तक उन्होंने अपना कर्तव्य निभाया और टाइटैनिक के साथ ही डूब गए। उनका शरीर उस घटना के दो हफ़्तों बाद बरामद हुआ और उनका वायलिन उनकी लाश के साथ बंधा हुआ था।

वायलिन वादक की मृत्यु के बाद इस वाद्ययंत्र को वापस इंग्लैंड में रहने वाली उनकी मंगेतर मारिया रोबिन्सन के पास भेज दिया गया। वर्ष 1939 को जब मारिया की मृत्यु हुई, तब उनकी बहन ने वायलिन को ब्रिद्लिंग्टन साल्वेशन आर्मी के नेता को सौंप दिया। कुछ साल बाद एक वायलिन शिक्षक ने उस कीमती वायलिन को अपने अधिकार में ले लिया और बाद में एक और महिला को दे दिया।


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वर्ष 2006 में उस महिला के पुत्र को यह वायलिन अपने घर के छज्जे पर मिला।

द विंटेज न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, हेन्री अल्द्रिग एंड सन नामक एक नीलामी घर का ध्यान इस खोज पर गया और उन्होंने इस वायलिन की प्रमाणिकता को जानने के लिए जाँच पड़ताल शुरू की। सभी साक्ष्यों को इकठ्ठा करने में सात वर्षों का समय लगा। वायलिन का फोरेंसिक विश्लेषण भी कराया गया जिसमें पूरे दो वर्षों का समय लगा। वर्ष 2013 में इस बात की घोषणा की गई और विल्त्शिर नीलामी घर की तरफ से कहा गया की यह वायलिन एक चमड़े के बक्से में मिला था जिसपर डब्ल्यू.एच.एच (W.H.H) प्रारंभिक अक्षर उकेरे हुए थे।

वर्ष 1910 में मारिया रोबिन्सन ने ख़ुद इस वायलिन पर नक्काशी की थी। उस पर लिखा था “मारिया की तरफ से हमारी सगाई के अवसर पर वाल्लस के लिए”। जर्मनी में निर्मित इस वायलिन को अपनी प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए और भी कई परीक्षणों से गुज़ारना पड़ा। जेमोलॉजिकल एसोसिएशन ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन के रजत विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणिकता सिद्ध हो जाने के बाद हेन्री अल्द्रिग एंड सन ने इस वायलिन को 19 अक्टूबर 1913 को एक अज्ञात खरीदार को बेच दिया। वायलिन का प्रारंभिक मूल्य $65,000 रखा गया, पर नीलामी में बोलियां इतनी ऊंची लगाई गई कf यह $1.7 मिलियन में बिका।

यह अब तक की सबसे महँगी बिकने वाली वायलिन है, साथ ही टाइटैनिक की यादगार भी।

वायलिन को बेलफ़ास्ट, उत्तरी आयरलैंड के पोत प्रांगण (शिपयार्ड) में दिखाया गया जहाँ आरएमएस टाइटैनिक जहाज़ बनाया गया था। बाद में इसे अमेरिका भेज दिया गया जहाँ यह बिकने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित हुआ।

बतातें चलें कि शुरू में हार्टले अपनी मंगेतर को छोड़कर टाइटैनिक में जाने के लिए तैयार नहीं थे। मगर भविष्य में और अधिक नौकरी अनुबंध प्राप्त करने के लिए उनको अपने बैंड के साथ जहाज़ पर जाना पड़ा। उनके पार्थिव शरीर को लिवरपूल में उनके पिता के हवाले कर दिया गया। बाद में उन्हें उनके गृहनगर कॉलने, लंकाशायर ले जाया गया जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

कहा जाता है कि उनके अंतिम संस्कार के वक़्त एक हज़ार लोग उपस्थित थे और 40 हज़ार से ज़्यादा लोग अंतिम दर्शन के लिए इंतज़ार कर रहे थे। उन्हें केइली रोड पर बने कब्रिस्तान में दफनाया गया है। उनकी कब्र का पत्थर 10 फीट ऊँचा है, जिसके आधार को नक्काशी करके वायलिन का आकार दिया गया है।


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