ग्रामीणों ने पीट-पीटकर तेंदुए को मार डाला, वन विभाग के कर्मचारी देखते रहे

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Updated on 25 Nov, 2016 at 3:26 pm

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गुड़गांव में एक तेंदुए को पीट-पीट कर मार डालने का मामला सामने आया है। यहां के सोहना स्थित मंडावर गांव में गुरुवार की सुबह एक तेंदुआ घुस आया था।

ग्रामीणों ने इस तेंदुए को पकड़ने और वन विभाग को सौंपने की बजाए डंडों से पीट-पीट कर इसे मार डाला।

आरोप है कि वक्त रहते वन-विभाग ने सतर्कता नहीं दिखाई। अगर ऐसा होता तो तेंदुए की जान बच सकती थी। इस तेंदुए की उम्र करीब ढाई साल थी। ग्रामीण कहते हैं अगर वन विभाग की टीम सही वक्त पर ट्रैंकुलाइजर गन लेकर पहुंच जाती तो तेंदुआ बच सकता था। ग्रामीणों का कहा है कि तेंदुए की मौत हमले से नहीं, बल्कि वन विभाग की बदइंतजामी की वजह से हुई है।

गौरतलब है कि गुड़गांव के नजदीक कई हजार एकड़ के क्षेत्र में जंगल है। यहां के वन्य जीव अक्सर अपने क्षेत्र से बाहर निकल कर रिहायशी क्षेत्रों में घुस आते हैं। बताया गया है कि वन विभाग के पास इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं।

यह तेंदुआ इस क्षेत्र में इकलौता नर तेंदुआ था। इसकी मौजूदगी के कारण ही मंडावर के अरावली जंगल क्षेत्र में दो मादा तेंदुआ गर्भवती पाई गई हैं।


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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे क्षेत्र में इस तरह के जानवरों पर काबू पाने के लिए सिर्फ एक ही ट्रैंकुलाइजर गन है। सुल्तानपुर में रखे इस गन को मंगवाया गया था, लेकिन यह समय पर उपलब्ध नहीं हो सका। इसी बीच, तेंदुए ने ग्रामीओं पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने डंडों से पीटकर उसे मार डाला।

मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारी और पुलिस बस तमाशा देखते रहे थे।

बताया गया है कि वन-विभाग के पास न तो उचित संख्या में वाहन हैं और न ही उनके कर्माचारियों को इस स्थिति से निपटने के लिए उचित प्रशिक्षण मिला है।

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