बिहार के इस गांव में चमगादड़ों को पूजते हैं लोग, हैरान रह जाएंगे आप

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Updated on 10 Jul, 2016 at 12:33 pm

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चमगादड़ों को भले ही हम में से कई गंदा पक्षी मानते हों, या फिर उनकी उपेक्षा करते हैं, लेकिन देश में एक गांव ऐसा भी है, जहां इनकी पूजा की जाती है। जी हां, बिहार के वैशाली जिले में सरसई नामक गांव है, जहां के निवासी मानते हैं कि चमगादड़ उनकी रक्षा करते हैं।

यही नहीं, चमगादड़ों को सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। और तो और इस गांव में चमगादड़ों को देखने के लिए बाहर से लोग आते हैं।

प्रदेश 18 की इस खबर के मुताबिक, ग्रामीण मानते हैं कि जहां चमगादड़ों का वास होता है, वहां धन की कमी कभी नहीं होती।

सरसई गांव के एक प्राचीन तालाब के नजदीक एक पीपल के पेड़ पर सैकड़ों की संख्या में चमगादड़ों ने अपना बसेरा बना रखा है। इस तालाब का निर्माण 15वीं सदी के शुरू में हुआ था।

करीब 50 एकड़ में फैले इस क्षेत्र में कई मंदिर स्थापित हैं, जिन्हें बनवाया था तिरहुत के राजा शिव सिंह ने।

सरसई पंचायत के सरपंच और प्रदेश सरपंच संघ के अध्यक्ष अमोद कुमार निराला के मुताबिक, कई चमगादड़ तो इतने बड़े हैं कि उनका वजन पांच किलो से अधिक है। इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

जनश्रुतियों के मुताबिक, मध्यकाल में वैशाली में महामारी फैली थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई। इसी दौरान यहां चमगादड़ भी आते गए और यहीं के होकर रह गए। इसके बाद से यहां कभी महामारी नहीं आई।


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