कभी साइकिल पर पान मसाला बेचा करते थे ‘कोठारी’, आज बैंकों को लगाई हजारों करोड़ की चपत

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Updated on 20 Feb, 2018 at 4:26 pm

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नीरव माेदी के 11400 कराेड़ के घाेटाले के बाद कानपुर के एक नामी काराेबारी विक्रम कोठारी पर 3695 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगा है।

 

 


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इस सिलसिले में बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर सीबीआई ने विक्रम कोठारी को गिरफ्तार भी कर लिया है। CBI विक्रम कोठारी के कानपुर स्थित घर पर पिछले 20 घंटे से ज्यादा समय से छापेमारी कर रही है।

 

 

शिकायत में आरोप लगाए गए हैं कि रोटोमैक केस में सात बैंकों के कंसोर्टियम के साथ 2919 करोड़ रुपए (प्रिंसिपल अमाउंट) के लोन को लेकर धोखाधड़ी की गई है। वहीं ब्याज मिलाकर रोटोमैक पर कुल 3695 करोड़ रुपए की देनदारी बनती है।

 

 

जिन बैंकों के साथ धोखाधड़ी की गई है, उनमें बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, इलाहाबाद बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स शामिल हैं।

 

 



बैंक काे हजाराें कराेड़ रुपये की चपत लगाने वाले विक्रम काेठारी की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। रोटोमैक के सीएमडी और उत्तर प्रदेश के कानपुर में ‘गुटखा किंग’ के नाम से मशहूर विक्रम कोठारी एक जाने माने उद्योगपति हैं।

 

विक्रम काेठारी ने 1992 में रोटोमैक ब्रैंड की शुरुआत की, जो अब भारत का एक नामी ब्रैंड बन चुका है। वहीं उनके पिता मनसुख भाई कोठारी ने ‘पान पराग’ नाम के गुटखा ब्रांड की शुरुआत की थी। वह अपने दो बेटों समेत परिवार के साथ किराये के घर में रहते थे। अपनी जीविका चलाने के लिए वह फेरी लगाकर नारियल तेल, बिस्कुट और बीड़ी बेचा करते थे।

70 के दशक में मनसुख भाई ने अपने बेटों दीपक कोठारी और विक्रम कोठारी के साथ वर्ष-1975 में पुड़िया वाला पान मसाला बनाकर बेचना शुरू किया। कानपुर में साइकिल चलाकर वह पान मसाला बेचा करते थे। छोटी पुड़िया में आने वाला यह पान मसाला लोगों को बहुत पसंद आने लगा।

 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ विक्रम कोठारी(बाएं) source

 

देखते ही देखते पान पराग बाजार में छा गया। पान मसाला खाने के शौकीन लोगों के बीच पान पराग को बेहद पसंद किया गया। 70 के दशक की शुरुआत में 5 रुपए में 100 ग्राम मिलने वाले इस पान मसाले ने बाजार में खूब धूम मचाई।

 

मनसुख भाई के बाद उनके पुत्र विक्रम ने इस पान मसाले का बिज़नेस का कार्यभार संभाला। पान पराग की बेहतरीन मार्केटिंग स्ट्रेटेजी के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स मिले। साथ ही कानपुर के गुटखा किंग का टाइटल भी उन्हें पान पराग के कारण ही मिला।

 

विक्रम कोठारी अपनी पत्नी साधना कोठारी के साथ

 

फिर बाद में प्रॉपर्टी में विवाद के कारण विक्रम और उनके भाई दीपक कोठारी के बीच बंटवारा हो गया। इस बंटवारे में 1973 में बना पान पराग ब्रैंड विक्रम कोठारी के भाई दीपक कोठारी के हिस्से में आ गया, जबकि विक्रम कोठारी के हिस्से में स्टेशनरी का व्यापार आ गया।

 

सलमान खान के साथ अपने प्रॉडक्ट का प्रचार करते विक्रम कोठारी

 

बता दें कि जिस विक्रम कोठारी का नाम लोन डिफॉल्ट के मामले में उछला है उन्हें साल 1983 में सामाजिक कार्यों में अहम योगदान के लिए लायन्स क्लब ने गुडविल एंबेसडर बनाया था।


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