क्या आपका बच्चा भी खेलता है विडियो गेम? तो यह खबर ज़रूर पढ़ें

Updated on 9 Aug, 2017 at 5:53 pm

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अक्सर लोगों को लगता है कि थोड़ी देर विडियो गेम खेलने से बच्चे का दिमाग फ्रेश हो जाता है और फिर उसके बाद वो बाकी के काम मन लगाकर करेगा। वैसे बच्चों के साथ ही कुछ बड़ों को भी विडियो गेम खेलने की आदत होती है, लेकिन विडियो गेम दिमाग को फ्रेश नहीं करता, बल्कि उसे कमज़ोर बनाता है।

नई रिसर्च के अनुसार, जो लोग अधिक विडियो गेम खेलते हैं, उनमें स्किज़ोफ्रेनिया, PTSD और अल्ज़ाइमर जैसे रोगों का ख़तरा बढ़ जाता है।

मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय के रिसर्चर ग्रेग वेस्ट के मुताबिक, जो लोग अधिक एक्शन विडियो गेम खेलते हैं, उनके दिमाग के अहम हिस्से ‘हिप्पोकैम्पस (Hippocampus)’ में ग्रे मैटर कम हो जाता है। इस हिस्से में जितना ग्रे मैटर कम होता है, उतना ही डिप्रेशन और अन्य दिमागी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है।


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जो लोग विडियो गेम फ़ायदेमंद बताते हुए कहते हैं कि जिन्हें विज़ुअल अटेंशन या भूलने की दिक्कत होती है, उनके लिए विडियो गेम लाभदायक होता है, तो उनकी बात नई रिसर्च से गलत साबित होती है।

इस रिसर्च में कई विडियो गेम खेलने वाले और विडियो गेम नहीं खेलने वालों के दिमाग की स्कैनिंग की तो पाया गया कि गेम खेलने वालों की तुलना में गेम नहीं खेलने वालों के दिमाग में ग्रे मैटर की मात्रा अधिक होती है। वैसे हिप्पोकैम्पस के अलावा दिमाग का दूसरा ज़रूरी भाग होता है ‘स्ट्रायटम (Striatum)’। यह  इंसान को रिलैक्स करने में मदद करता है। ये उन चीज़ों पर ध्यान देता है, जो काम के अलावा इंसान के ख़ुश रखने के लिए ज़रूरी हैं। जैसे खाना, पीना, सेक्स आदि।

जो लोग डायमेंशिया, सिज़ोफ्रेनिया, PTSD, डिप्रेशन और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी से ग्रसित हैं, उन्हें वीडियो गेम बिल्कुल नहीं खेलना खेलना चाहिए, क्योंकि इसे बीमारी और बढ़ सकती है।

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