सुन्दरलाल बहुगुणा ने पर्यावरण को बचाने में समर्पित किया अपना जीवन, दुनिया में ‘वृक्षमित्र’ के नाम से हुए प्रसिद्ध

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Updated on 9 Jan, 2017 at 9:47 pm

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पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में अहम भूमिका निभाने वालों में अगर सर्वप्रथम किसी का नाम लिया जाता है, तो वह हैं सुंदरलाल बहुगुणा।

9 जनवरी, 1927 को उत्तराखंड के सिलयारा में जन्‍में सुंदरलाल एक प्रसिद्ध पर्यावरणविद के रूप में विख्यात हैं। चिपको आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक सुन्दरलाल ने 1971 में पेड़ों को काटे जाने के विरोध में 16 दिनों तक लगातार अनशन किया।

यह एक ऐसा आंदोलन था, जिसमें कई महिलाएं पेड़ों को बचाने के लिए उनसे चिपक जाया करती थी।

उस वक्त उत्तराखंड में पेड़ों को काटने से रोकने के लिए महिलाओं के एक नारे की आवाज दूर-दूर तक गूंजी थी।” पहले हमें काटो तब जंगल और पेड़”- इस नारे के सामने, पेड़ काटने वाले ठेकेदारों और सरकार सबको घुटने टेकने पड़े थे।

पर्यावरण संरक्षक सुंदर लाल बहुगुणा के प्रयासों का ही नतीजा रहा कि आंदोलन के बाद 15 सालों तक के लिए उत्तराखंड में सरकार ने पेड़ काटने पर पूरी तरह से रोक लगा दी। यही वह आंदोलन रहा जिसके बाद से सुंदरलाल विश्वभर में ‘वृक्षमित्र’ के नाम से प्रसिद्ध हो गए।


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उन्होंने वर्ष 1965 से 1970 के बीच पहाड़ी इलाकों में शराबबंदी को लेकर महिलाओं को एकजुट कर, शराब बंदी पर रोक लगाने के लिए आंदोलन की भी शरुआत की।

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जनता को संबोधित करते हुए सुंदरलाल बहुगुणा timescontent

सुंदरलाल बहुगुणा ने 1981 से 1983 के बीच पर्यावरण को बचाने का संदेश लेकर, चंबा के लंगेरा गांव से हिमालयी क्षेत्र में करीब 5000 किलोमीटर की पदयात्रा की। यह यात्रा 1983 में विश्वस्तर पर सुर्खियों में रही।

बहुगुणा के प्रयासों को सराहते हुए अमेरिका की फ्रेंड ऑफ नेचर नामक संस्था ने उन्हें 1980 में सम्‍मानित किया। 1984 में राष्ट्रीय एकता पुरस्कार और साल 2009 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म विभूषण से भी नवाजा गया।

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पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, सुंदरलाल बहुगुणा को पद्म विभूषण पुरस्कार देते हुए netindian

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