इन 8 कारणों की वजह से वाराणसी को हेरिटेज सिटी के रूप में मान्यता देनी चाहिए।

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Updated on 29 Dec, 2015 at 8:47 pm

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“बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किवदंतियों से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है।” – मार्क ट्वेन

जब भी हम बनारस की बात करते हैं, एक रमणीय से माहौल की अनुभूति होती है। न केवल धार्मिक नज़रिए से, बल्कि अगर हम इस शहर को एक टूरिस्ट के नज़रिए से भी देखें, तो हमें कोई निराशा नही होगी, क्योंकि यहां की धरती का वैभव ही कुछ अलग है। हालांकि, आपको अजीब लग सकता है कि दुनिया का यह प्राचीनतम शहर UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की सूची में नहीं है। यहां हम आपको बताने जा रहे वो 8 कारण की क्यों आखिरकार वाराणसी को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की सूची में शामिल किया जाना चाहिए, वह भी जल्दी ही।

1. सबसे पुराने बसे शहरों में से एक

अगर हिन्दू धर्म दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म है, तो फिर वाराणसी या काशी निश्चित रूप से सबसे पुराने शहरों में से है, जो अभी तक बसा हुआ है। जब आप प्राचीन हिंदू धार्मिक ग्रन्थ, ऋग्वेद पढ़ते है, तो आपको उसके कुछ अध्यायों में काशी का उल्लेख भी मिलता है।


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पौराणिक कथा के अनुसार, इस शहर का निर्माण पृथ्वी की रचना करने वाले विश्वकर्मा द्वारा हुआ था। इस शहर को भगवान शिव का पवित्र निवास स्थान भी माना जाता है।

2. शहर जहां बसता है हर कोई

अगर आप ऐसा सोचते हैं कि वाराणसी केवल हिन्दुओं के लिए ही खास है, तो आप गलत सोचते हैं। वाराणसी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही सारनाथ है, जहां गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों को पहला उपदेश दिया था।

और, यह भारत एवं विश्व के उन शहरों में से एक है जहाँ आपको एक ही सीमा को साझा करते हुए मंदिर और मस्जिद मिलेंगे।

3. शिक्षा का केंद्र

वाराणसी उच्च शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केन्द्र भी है। इसे सही मायनों में पहचान तब मिली जब एनी बेसेन्ट ने सेंट्रल हिंदू स्कूल की स्थापना ब्रह्मविद्या के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए किया, जो अब सबसे अधिक परिष्कृत संस्थानों में से एक है।

इसके अलावा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) को आज भी सभी विषयों से अध्ययन करने और असंख्य विषयों पर शोध करने का भारत के सबसे सर्वश्रेष्ठ केन्द्रों में से एक माना जाता है।

4. वास्तुकला का भण्डार

अगर आप वास्तुकला के सच्चे कद्रदान हैं तो आप यहां बनारस आकर कभी निराश हो ही नहीं सकते। राजसी रामनगर किले से लेकर पहाड़ी के ऊपर स्थित अद्भुत चुनार किला, विशाल गंगा, और कई घाट यहाँं के मुख्य आकर्षण हैं।

आप इस शहर को बेहतरीन वास्तुकला का गढ़ कह सकते हैं, जितनी बार भी आप यहां चले जाएं, आपको हर बार नई अनुभूति का एहसास होगा।



5. काशी के मंदिर

बड़े शहरों और महानगरों की तुलना में वाराणसी एक छोटा शहर है, लेकिन इसके बावजूद यहां करीबन 23 हजार छोटे-बड़े मंदिर हैं। जिनमें से एक प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर है, जो देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

यह शहर मणिकर्णिका घाट के लिए भी विख्यात है। इसकी मान्यता है कि अगर एक हिन्दू का अंतिम संस्कार यहां किया जाता है, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

6. सांस्कृतिक लोकनीतियां है निहित

वाराणसी की पारम्परिक कला का इतिहास काफी पुराना है। वाराणसी को कत्थक नृत्य रूपों में से एक की जननी माना जाता है और भारतीय शास्त्रीय संगीत की पारम्परिक नींव भी यहीं रखी गई थी। यह तुलसीदास, कबीर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, देवकीनंदन खत्री और ऐसे ही कई प्रसिद्ध लेखकों और कवियों का आवास स्थान रहा है।

वाराणसी विभिन्न कलाओं का केंद्र है। यहां जब आप घूमने निकलेंगे, तो आपको यहां की कई दीवारों पर बेहतरीन चित्रकारी के नमूने दिखेंगे। यहां कई कुटीर उद्योग हैं, जिनमें बनारसी रेशमी साड़ी, कालीन उद्योग, कपड़ा उद्योग, और हस्तशिल्प प्रमुख हैं।

7. गंगा किनारे बसा पावन शहर

वाराणसी की संस्कृति का गंगा नदी से एक गहरा अटूट रिश्ता है। इससे वाराणसी का धार्मिक महत्व जुड़ा हुआ है। यहां देश-विदेश से कई श्रद्धालु आते हैं। यहां कई घाट हैं, जिनकी धार्मिक मान्यताएं है। उनका वातावरण रमणीय है।

और हां, यहां गए और नाव की सवारी नहीं की, यह तो हो ही नहीं सकता। गंगा नदी का स्पर्श लेना मानों ज़िन्दगी का उद्धार हो जाना।

8. सबके लिए खुले हैं यहां के द्वार

कोई फर्क नहीं पड़ता आप अमीर है या गरीब, यह शहर सबका स्वागत करता है।

और, यह उन शहरों में से एक है जहां कोई गरीब खाली पेट नहीं सोता।


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