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ये हैं दुनिया के 6 फालतू अविष्कार जो किसी काम के नहीं हैं

8:28 pm 11 Nov, 2017

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आवश्यकता अविष्कार की जननी है। इंसान अपनी ज़रूरतों के लिए ही अविष्कार करता है चाहे वो सही हो या गलत। इस बात में दो राय नहीं है कि बहुत से अविष्कारों ने हमारी ज़िंदगी आसान बना दी है, लेकिन सब अविष्कार उपयोगी हों ये ज़रूरी नहीं। कुछ अविष्कार ऐसे भी हुए हैं, जो बिल्कुल भी उपयोगी नहीं हैं, लेकिन इसे करने वालों को इसने बहुत फायदा पहुंचाया है।

1. आलू पर लिखित संदेश भेजना

Useless inventions

मई 2015 में टेक्सास के 24 साल के एप डेवलपर एलेक्स क्रेग ने यह आइडिया ईजाद किया कि लोग आलू पर अपने संदेश लिखकर भेज सकते हैं। आज के इंटरनेट के दौर में यदि कोई इस तरह की बात करें तो ज़ाहिर है आप उसे बेवकूफ ही कहेंगे। एलेक्स की गर्लफ्रेंड ने भी उसके इस आइडिया को बेवकूफाना करार दिया, लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस आइडिया के लॉन्च करने बाद 2 दिनों के अंदर ही कंपनी को 2000 डॉलर की कमाई हुई। पांच महीने के अंदर ही एलेक्स ने यह कंपनी 40 हजार डॉलर में बेच दी।

2. ‘आई एम रिच’ एप

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दुनिया में बहुत से अमीर लोग हैं और कुछ अमीर बेवकूफ भी हैं। ऐसे ही लोगों के लिए एक ऐप बना ‘आई एम रिच’। ये एप जर्मनी के डेवलपर अर्मीन हेनरीक ने बनाया था। वर्ष 2008 में अमेरिका के 6, फ्रांस के एक और जर्मनी के एक शख्स ने एप्पल एप स्टोर से ये एप डाउनलोड किया, जिसके लिए उन्हें 999.99 डॉलर चुकाने पड़े। हालांकि, एप्पल ने एक ही दिन बाद अपने स्टोर से ये एप डिलीट कर दिया, लेकिन एक दिन में 8 बेवकूफ अमीरों ने ये एप डॉउनलोड कर लिया और हेनरीक ने इससे करीब 5,600 डॉलर कमाएं। एप्पल को इससे 2400 डॉलर की कमाई हुई। ज़रा कल्पना कीजिए कि एक दिन में यदि इतनी कमाई हुई तो यदि एप हटाया नहीं जाता तो एप्पल कितनी कमाई कर लेता।

3. द मिलियन डॉलर होमपेज

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यह एक वेबसाइट है जिसे इंग्लैंड के स्टुडेंट एलेक्स त्यू ने 2005 में बनाया था। इसके ज़रिए वो अपनी कॉलेज की पढ़ाई का खर्च निकालन चाहता था। इस वेबसाइट को बनाने के पीछे विचार था कि होमपेज को 1000 X 1000 पिक्सेल के दस लाख पिक्सल में बांट दिया जाएगा और प्रत्येक पिक्सेल को 1 डॉलर में बेच दिया जाएगा। 26 अगस्त, 2005 को लॉन्च किए जाने के बाद से ही यह पूरे इंटरनेट पर छाया हुआ था और कई ऑफर्स के साथ यह दिख रही थी। आखिरी 1000 पिक्सेल eBay पर निलामी के जरिए 38,100 डॉलर में बिका।

4. प्लास्टिक विशबोन


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केन अहरोनी परंपराओं पर विश्वास करने वाले शख्स थे। वर्ष 1999 में जब वो अपने करियर में बदलाव चाह रहे थे, तभी थैंक्सगिविंग के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि लोग थैंक्सगिविंग के लिए पूरे साल इंतज़ार करते हैं और जो आकर्षण में विश्वास करते हैं वो 12 महीने इंतज़ार करते हैं, ताकि पके हुए टर्की से विशबोन मिल सके। हालांकि इस तरह साल में 1 या 2 लोगो को ही विशबोन मिल पाती है और बाकी लोग निराश हो जाते हैं।

इसलिए केन ने इस समस्या के समाधान के लिए प्लास्टिक विशबोन का बनाने के लिए एक कंपनी स्थापित की, जो असली विशबोन जैसा ही प्लास्टिक का विशबोन बनाने लगी। जल्द ही यह बहुत पॉप्युलर हो गया और 6 महीने के अंदर ही उसकी कंपनी ने 50,000 डॉलर के विशबोन बेच दिए।

5. पेट रॉक्स

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दुनिया में ऐसे लोगो की कमी नहीं है, जो फालतू चीज़ों पर भी पैसे बर्बाद करने के लिए तैयार रहते हैं। वर्ष 1970 में गैरी दहल नामक कैलिफोर्निया के एक शख्स ने अजीब आइडिया निकाला और पत्थरों को पेट रॉक्स (पालतू पत्थर) बताकर बेचने लगा। यदि आप ये सोच रहे हैं कि पेट रॉक्स बहुत खास होते हैं और किसी खास जगह पर ही मिलते हैं तो आप बिल्कुल गलत हैं, क्योंकि यह बिल्कुल साधारण पत्थर ही होता है। कार्डबोर्ड कवर में पैक करके इसे 4 डॉलर मे बेचा जाता था। 1975 में यह काफी पॉप्युलर था और गैरी ने कुल 1.5 मीलियन पेट रॉक्स बेचे।

6. पॉप-अप ऐड

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इंटरनेट पर आने वाले पॉप अप ऐड से आप भी परेशान रहते होंगे। इंटरनेट पर काम करने वाला हर शख्स इससे परेशान रहता है। कोई आर्टिकल या न्यूज़ पढ़ते समय अचानक स्क्रीन पर पॉप अप ऐड आ जाता है और कई बार कोई अनचाहा विडियो भी प्ले होने लगता है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस फालतू ऐड का अविष्कार किसने किया था। इसे बनाया था इथेन ज़ुकरमैन ने। हालांकि, उनका मकसद लोगों को परेशान करना नहीं था। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वो तो बस एक विज्ञापन बनाने की कोशिश कर रहे थे, जो सीधे वेबसाइट पर न जाए, क्योंकि एडवर्टाइज़र को डर रहता है कि गलत ऐड गलत कॉन्टेंट पर न दिख जाए। ज़ुकरमैन का इरादा चाहे जो हो अपने इस अविष्कार से उन्होंने बहुत पैसे कमाए हैं।

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