पाकिस्तान के साथ आर-पार के मूड में मोदी सरकार, सभी विकल्प खुले

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Updated on 20 Sep, 2016 at 11:11 am

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उरी में सेना कैम्प पर हुए आतंकवादी हमले के बाद केन्द्र सरकार पाकिस्तान के साथ आर-पार के मूड में दिख रही है। पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के लिए भारत ने सभी विकल्प खुले रखे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को जहां एक के बाद एक कई दौर की बैठक की, वहीं वह अचानक राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से जाकर भी मिले। दूसरी तरफ, सरकार ने मंगलवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। तेजी से बदल रहे घटनाक्रम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग किए जाने और सीमा पर अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान पर जवाबी हमला तेज किया जा सकता है। पाकिस्तान से लगी सीमा पर फौज तैनात की जा सकती है। साथ ही भारत की सीमा में रहकर मोर्टार या इस तरह के अन्य शस्त्रों का उपयोग किया जा सकता है, ताकि, पाक अधीकृत कश्मीर में चल रहे आतंकवादी कैम्प खत्म किए जा सकें। इस तरह की कार्रवाई में पाकिस्तान भी जवाबी हमला कर सकता है।

रूस ने पाकिस्तान के साथ रद्द किया सैन्य अभ्यास, एमआई-35 हेलिकॉप्टर भी नहीं मिलेगा

उरी हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत द्वारा पाकिस्तान को अलग-थलग किए जाने की कोशिश रंग लाई है। रूस ने पाकिस्तान के प्रस्तावित सैन्य अभ्यास रद्द कर दिया है, वहीं तीन एमआई-35 हेलिकॉप्टर बेचने की योजना से भी किनारा कर लिया है।

रूस उरी हमले को चिन्ताजनक करार दिया है। सोमवार को रूस के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि हम उरी हमले की जोरदार शब्दों में निंदा करते हैं।


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अक्टूबर महीने में रूस के राष्ट्रपति पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय शिखर बैठक होनी है।

सकते में चीन, चिन्ता का माहौल

उरी में पाकिस्तान प्रायोजित हमले के बाद चीन भी सकते में है और यहां चिन्ता का माहौल है। दरअसल, चीन पाक अधीकृत कश्मीर के विवादित क्षेत्र में बन रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर में 46 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है और माना जा रहा है कि पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे आतंकी कार्रवाई की वजह से इस परियोजना को नुकसान हो सकता है।

चीनी राजनयिक जेची ने भारत की एनएसजी सदस्यता और मौलाना अजहर मसूद पर प्रतिबंध के मामले को लेकर चीनी राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है। इसमें लिखा गया है कि अगर चीन भारत के खिलाफ नरम रवैया नहीं अपनाता है तो उसे नुकसान उठाना पड़ेगा।

इस बीच, जापान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, फ्रांस, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत को समर्थन देने की घोषणा की है।

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