यह गिरोह फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग कर फर्जी आधार बनाता था

Updated on 12 Sep, 2017 at 11:30 pm

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सरकारी कामकाज के लिहाज से आधार कार्ड को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ये भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है और दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक आईडी कार्ड प्रोग्राम है। हालांकि, अब आधार की वेबसाइट को हैक कर फ़र्जी पंजीकरण करने वाले एक गिरोह के पर्दाफाश हुआ है। इसके साथ ही अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि ऐसी परियोजना की वेबसाइट को सुरक्षा के लिहाज से कमजोर क्यों रखा गया है?

उत्तर प्रदेश पुलिस 10 लोगों के एक गिरोह को गिरफ़्तार किया है, जो नकली आधार कार्ड बनाने में लिप्त थे। ये गैंग यूआईडीएआई के बायोमैट्रिक मानकों की अनदेखी कर फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग कर फर्जी पंजीकरण करता था। पुलिस ने इन जालसाज़ों के पास से फिंगरप्रिंट स्कैनर्स, आईरिस स्कैनर, लैपटॉप, रबड़ स्टैम्प्स, आधार कार्ड, जीपीएस उपकरण और भारी मात्रा में प्रिंटिंग सामग्री जब्त किया है।

इससे पता चलता है कि फर्जी आधार बनाने वाले गिरोह का कारबार बड़ा है। उनके पास से 12 मोबाइल, 2 आधार कार्ड स्कैनर, 2 रेटिना स्कैनर के साथ ही भारी मात्रा में कई अन्य सामान और डिवाइस भी मिले हैं। गिरोह के पास कोई विशेष सॉफ्टवेयर है, जिसकी मदद से यूआईडीएआई के सर्वर पर उपलब्ध डाटा से छेड़छाड़ किया जाता था। गैंग का सरगना सौरभ सिंह है, जो कानपूर का निवासी बताया जा रहा है।


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आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बतायाः”राज्य के विभिन्न जिलों में पिछले 6 महीनों से फर्जी आधार कार्ड का निर्माण इस गिरोह के द्वारा किया जा रहा था। ये लोग अभी तक कितने फर्जी आधार कार्ड बना चुके हैं, ये अनुमान लगाना कठिन है। ये लोग ग्राहकों से 50 रुपये से 150 रुपये लेकर आधार कार्ड बनाते थे। ये लोग ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के लिए गोरखधंधा कर रहे थे।”

 



एसटीएफ को सबसे पहले इस बावत खुफिया जानकारी मिली, जिस पर यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के डिप्टी डायरेक्टर ने साइबर क्राइम थाना लखनऊ में केस भी दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस और एसटीएफ की टीम इस गिरोह के जालसाजों की तलाश में जुट गई और आखिरकार उन्हें सदल-बल गिरफ्तार कर लिया गया।

इस मामले के उजागर होने से आधार पंजीकरण व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने कहा कि यूआईडीएआई द्वारा अनिवार्य की गई इनफार्मेशन सुरक्षा नीति कई स्तरों, जैसे रजिस्ट्रार, नामांकन एजेंसियों, पर्यवेक्षकों, सत्यापनकर्ता और ऑपरेटर पर कमजोर है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण आधार नामांकन प्रक्रिया को सुरक्षा के लिए ऑडिट किया जाएगा।

हाल ही में आधार कार्ड को टैक्स रिटर्न दाखिल करने के उद्देश्य से अनिवार्य कर दिया गया है। लिहाजा 100 करोड़ आवेदन मिले हैं। केंद्र द्वारा डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए आधार डेटा को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, सुरक्षा में सेंध जैसे वाकयात से लग रहा है कि सूचना के दुरुपयोग को बढ़ावा मिल सकता है। इसको सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।


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