देश के सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार सोनिया गांधी की ये तस्वीरें शायद ही आपने देखी होंगी

Updated on 4 Jan, 2018 at 1:15 pm

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“साथ मिलकर हम किसी भी तरह की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं, चाहे वो सागर जितनी गहरी हो या आसमान जितनी ऊंची” : सोनिया गांधी

भारत के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की बहू बनने वाली सोनिया गांधी की ज़िंदगी आम महिलाओं के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है। बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सोनिया गांधी की गिनती अब दुनिया की ताकतवर महिलाओं में होती है और वह भारत की ताकतवर राजनेता भी हैं। हालांकि, यहां तक आने का उनका सफ़र आसान नहीं था।

18 साल की सोनिया मायनो जो एक रेस्टोरेंट में वेट्रेस का काम करती थी, की मुलाकात एक खूबसूरत इंजीनियरिंग छात्र से हुई और कुछ मुलाकातों को बाद इस कपल ने शादी कर ली। उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बहुत खुशहाल थी, लेकिन एक हादसे ने सोनिया की ज़िंदगी उजाड़ दी। हालांकि, इससे सोनिया टूटी नहीं, बल्कि खुद को और मज़बूत किया।

सोनिया गांधी यानी सोनिया मायनो का जन्म इटली में हुआ था। वह और उनकी एक बहन अपनी मां के साथ ओरबैसानो में रहती थी। स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए सोनिया कैम्ब्रिज चली गईं। 1964 में वह कैम्ब्रिज के लैंग्वेज स्कूल में इंग्लिश पढ़ने लगीं। पढ़ाई के साथ ही सोनिया पार्ट टाइम नौकरी करती थी वेट्रेस के रूप में। यहीं उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई जो उस वक़्त कैम्ब्रीज यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग कर रहे थे।

कुछ मुलाकातों के बाद दोनों में प्यार हो गया और 1968 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद सोनिया अपनी सास इंदिरा गांधी जो उस वक़्त प्रधानमंत्री थी, के साथ ही दिल्ली में रहने लगीं। कहा जाता है कि सोनिया और राजीव की राजनीति में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। इस कपल के दो बच्चे प्रियंका और राहुल गांधी हुए।


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राजीव पायलट थे और सोनिया घर और बच्चों की देखभाल में बिज़ी रहती थी। मगर छोटे भाई संजय गांधी की मौत के बाद राजीव को राजनीति में आना पड़ा। 1985-1989 तक वो देश के प्रधानमंत्री भी रहे। प्रधानंत्री की पत्नी होने के नाते सोनिया राजीव की ऑफिशियल एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में काम करती थी। वह उनके साथ कई राज्यों के दौरे पर भी साथ जातीं रही थीं।

1991 में आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की मौत के बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। तब कंग्रेस पार्टी ने पी.वी नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बनाया।

1997 में कांग्रेस पार्टी को कमज़ोर होता देख सोनिया ने राजनीति में कदम रखा। 1998 में वह पार्टी लीडर बन गईं। 1999 में उनके विदेशी मूल का मुद्दा उठा, तब उन्होंने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया।

2011 में उनकी सर्वाइकल कैंसर के लिए सर्जरी भी हो चुकी है। 2013 में फोर्ब्स मैगज़ीन की सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में सोनिया 9वें नंबर पर थीं।

इतना ही नहीं, 2007-2008 में वह दुनिया के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों में भी शामिल रहीं।

सोनिया गांधी ने हमेशा मुश्किल हालात का सामना करके साबित कर दिया कि वो हालात की सताई हुई नहीं हैं, बल्कि किसी नायिका की तरह मुश्किलों से उबरना जानती हैं।

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