अब गायों के लिए भी जारी होंगे आधार कार्ड सरीखे UID नंबर!

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Updated on 24 Apr, 2017 at 6:48 pm

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अब केन्द्र सरकार गायों के लिए आधार कार्ड सरीखे UID नंबर पर विचार कर रही है।

हाल के दिनों में देश भर में गोहत्या तथा गोरक्षा का मुद्दा छाया रहा है। ऐसे में गायों की तस्करी रोकने के लिए उद्येश्य से सरकार चाहती है कि पशुओं की सुरक्षा के लिए आधार कार्ड जैसा सिस्टम लागू किया जाए। केंद्र सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर गायों की तस्करी की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है, जिसमें यह सिफारिश की गई है।


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सरकार का कहना है कि UID नंबर सरीखी व्यवस्था के जरिए गायों को न केवल चिह्नित करना आसान होगा, बल्कि उन्हें ट्रैक करना भी आसान हो जाएगा। इससे गाय की नस्ल, उम्र, रंग और बाकी चीजों का ध्यान रखा जा सकेगा।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि परित्यक्त पशुओं की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकार की है। साथ ही प्रत्येक जिले में छोड़े गए जानवरों के लिए 500 की क्षमता वाला एक शेल्टर होम होना चाहिए। इससे जानवरों की तस्करी में काफी हद तक कमी आएगी।

गौरतलब है कि भारत-बांग्लादेश की सीमा पर गायों की तस्करी एक बड़ा मसला है। इस वजह से भारत-बांग्लादेश के बीच गोलीबारी तक की नौबत आ जाती है। पश्चिम बंगाल की सीमा से सालाना हजारों की संख्या में गायों की तस्करी कर बांग्लादेश पहुंचा दिया जाता है।

अब केन्द्र सरकार चाहती है कि इस पर पूरी तर रोक लगाई जाए।

यही वजह है कि संयुक्त सचिव की अगुआई में एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें कुछ खास सिफारिशें की गईं हैं।

बांग्लादेश गोमांस की बड़ी खपत करता है। माना जाता है कि बांग्लादेश में भारतीय गाय अधिक कीमतों में बेची जाती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रत्येक साल करीब 3.5 लाख गायों को तस्करी के जरिए बांग्लादेश पहुंचाया जाता है। यह अवैध कारोबार करीब 15 हजार करोड़ रुपए सालाना का है।

सीमा सुरक्षाबल का कहना है कि सीमा से प्रतिदिन करीब 200 से 250 गायों को बरामद किया जाता है। साल 2014 और 2015 के दौरान 34 गाय तस्करों को मुठभेड़ में मार गिराया गया था। गायों की तस्करी सबसे अधिक असम से होती है। यहां से बांग्लादेश की करीब 263 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है।


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