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नीरू ने जलाया है शिक्षा का दीपक, गांधी दर्शन को बढ़ा रही हैं आगे

Published on 9 April, 2016 at 6:19 pm By

महात्मा गांधी का कहना था कि ‘Be the change you wish to see in the world’ मतलब कि आप जिस तरह का बदलाव समाज में देखना चाहते हैं उसकी शुरुआत खुद से करनी होगी, तभी बदलाव संभव है। इस विचार को वास्तविकता में बदला है नीरू जुनेजा ने।


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नीरू ने दिल्ली के सफदरजंग इलाके के झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे बच्चों के अंधकारमय भविष्य में शिक्षा रूपी दीया जलाया है।

उनके इस प्रयास ने हजारों बच्चों की जिंदगी बदल दी। बच्चों के साथ-साथ नीरू ने उन गरीब महिलाओं को भी साक्षर बनाया है, जिनके नसीब में कभी स्कूल जाना नहीं लिखा था।

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बात वर्ष 1998 की है। जब नीरू के दोनों बच्चे स्कूल जाने लगे थे, तो घर में अकेला रहना खलता था।

एक दिन उन्होंने खाना बनाने आने वाली अपनी सहायिका से पूछा कि क्या उसके बच्चे स्कूल जाते हैं, तो इसका जवाब उन्हें संतोषजनक नहीं लगा। मतलब यह था कि सहायिका के बच्चे स्कूल जाते तो थे, लेकिन पढ़ाई के नाम पर सिर्फ दरजे पास कर रहे थे। बच्चे कहने को तो पांचवीं में थे लेकिन मामूली जोड़-घटाना करना भी उनके लिए दूसरी दुनिया की चीज थी।

नीरू को यह अच्छा नहीं लगा। उन्होंने सहायिका के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाना शुरू कर दिया। वह मेहनत करती गई, धीरे-धीरे और बच्चे आने शुरू हो गए। नतीजा यह हुआ कि इलाके के बच्चे सरकारी स्कूल छोड़कर नीरू के पास पढ़ने आने लगे।



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एक दिन उस इलाके का मुखिया इनके पास आया और शिकायती लहजे में बोला कि आप बच्चों को पढ़ाना बंद कर दीजिए वे आपकी वजह से स्कूल नहीं जाना चाहते हैं।


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नीरू को यह बात बुरी लगी। उन्होंने मुखिया को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। मुखिया के फरमान की वजह से झुग्गी वालों ने अपने बच्चों को इनके पास पढ़ने आने से मना कर दिया।

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झुग्गी वालों को यह नहीं पता था कि वह जाने-अनजाने अपना ही नुकसान कर रहे हैं, लेकिन नीरू यह बात समझती थीं। बच्चों को उनका बुनियादी हक दिलाने का जुनून लिए वह झुग्गियों में जाकर वहीं बच्चों को पढ़ाने लगी। दिक्कतें बहुत हुई, लेकिन इरादा पक्का था, बस फिर बच्चों के साथ-साथ उन लड़कियों ने भी पढ़ना शुरू कर दिया, जो स्कूल नहीं जा पा रहीं थीं।

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नीरू ने लगभग 10 साल तक इसी तरह बच्चों को पढ़ाया। वर्ष 2008 में नीरू की इस मुहिम से और भी लोग जुड़ते गए और देखते-देखते नीरू के लगाए एक पौधे ने विशाल वृक्ष का आकार ले लिया। हाल ही में इसे एक NGO का रूप दिया गया है, जिसका नाम उद्यम ट्रस्ट रखा।

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अब यहां बच्चों की पढ़ाई के अलावा महिलाओं को जागरूक भी किया जाता है। मसलन सबके पास बैंक अकाउंट होना चाहिए। उन्हें छोटी-मोटी बीमारियों के उपचार के बारे में भी बताया जाता है।

नीरू के जज्बे, जुनून और जिद को हमारा सलाम।


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