मुस्लिम महिला ने चीफ जस्टिस को लिखा खून से खत, मांगा इन्साफ या मरने की इजाजत

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Updated on 1 Dec, 2016 at 11:34 am

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मध्य प्रदेश के देवास में रहने वाली एक मुस्लिम महिला ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर को खून से पत्र लिखकर तीन तलाक के मुद्दे पर इन्साफ की गुहार लगाई है। महिला ने मुख्य न्यायाधीश से कहा है कि या तो उसे इन्साफ दिया जाए या फिर मरने की इजाजत दी जाए।

शबाना नामक इस महिला का आरोप है कि नर्सिंग का कोर्स करने के बाद वह नौकरी करना चाहती थी, लेकिन उसका पति उससे खेतों में काम करवाना चाहता था। उसके द्वारा ऐसा करने से मना करने पर मारपीट करता था और दहेज के लिए प्रताड़ित भी करता था। बाद में उसके पति ने तीन बार तलाक कहकर संबंध समाप्त कर लिया और दूसरी शादी कर ली। इससे उसकी और चार साल की बेटी का भविष्य अंधकारमय हो गया है।



इस रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने खून से लिखे पत्र के माध्यम से तीन तलाक की इस प्रथा को खत्म करने की मांग की है। उसने कहा है कि वह तीन तलाक के सख्त खिलाफ है और उसे देश के कानून के मुताबिक न्याय मिलना चाहिए। उसने कहा है कि वह ऐसे पर्सनल लॉ को नहीं मानती, जिसकी वजह से उसकी जिन्दगी तबाह हो गई है।

वहीं, दूसरी तरफ महिला के पति टीपू का कहना है कि शबाना हमेशा नौकरी की बात करती थी। यह परिवार तय करेगा कि उसे बाहर नौकरी करना है या नहीं। टीपू का कहना है कि उसने शबाना को इस्लामिक रिवाजों के तहत तलाक दिया है।


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गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से तीन तलाक के नियम का देशव्यापी विरोध हो रहा है। इस तरह के कई मामले कोर्ट में पहुंचे हैं और कई संगठन मुस्लिम समाज में व्याप्त तीन तलाक की प्रथा को खत्म करने के लिए अपने स्तर पर लड़ाइयां लड़ रहे हैं।


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