भगवान से शादी करते हैं किन्नर और अगले दिन हो जाते हैं विधवा, वजह दिलचस्प है!

Updated on 3 Jul, 2018 at 3:44 pm

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किन्नरों को आपने शुभ अवसरों जैसे किसी दुकान के उद्घाटन और बच्चों के जन्म पर पैसे मांगते और नाचते-गाते देखा होगा, लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि उनकी शादी होती है? किन्नरों की शादी! है न अजीब बात, लेकिन ये सच है। हमारे देश में एक जगह ऐसी भी है जहां किन्नरों की शादी होती है, लेकिन यह शादी किसी आम इंसान से नहीं, बल्कि भगवान से होती है।

 

किन्नर का सच

 

जी हां, आपको सुनकर भले ही हैरानी हुई होगी, मगर ये सच है कि अरावन देवता से किन्नर शादी करते हैं। अरावन किन्नरों के अराध्य देव भी हैं, यही वजह है कि दक्षिण भारत में किन्नरों को अरावनी नाम से भी जाना जाता है। अरावन का महाभारत से भी गहरा संबंध है। तमिलनाडु के कूवगम गांव में अरावन देवता का खास मंदिर है। यह मंदिर इसलिए खास है, क्योंकि यहीं पर किन्नर और भगवान की शादी होती है। इस परंपरा में शादी के अगले ही दिन सभी किन्नर भगवान की विधवा के रूप में रोते हैं।


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अब आप सोच रहे होंगे कि ये अरावन देवता कौन हैं और यदि ये देवता हैं तो सब जगह क्यों नहीं पूजे जाते। महाभारत की कथा के अनुसार, एक बार अर्जुन को द्रौपदी से शादी की एक शर्त तोड़ने की वजह से एक साल तक इंद्रप्रस्थ से दूर रहना पड़ा था। इंद्रप्रस्थ से निकलने के बाद अर्जुन उत्तर-पूर्व भारत गए और वहां उलूपी नाम की एक नागकन्या से उन्होंने शादी कर ली। शादी के कुछ समय बाद उलूपी ने बेटे जो जन्म दिया, जिसका नाम अरावन रखा गया। बेटे के जन्म के बाद अर्जुन वहां से चले गए, जबकि बेटा अरावन वहीं नागलोक में मां उलूपी के साथ रहा। बड़ा होने पर वह नागलोक छोड़कर अपने पिता अर्जुन के पास पहुंच गया। उसी समय महाभारत का युद्ध चल रहा था। ऐसे में अर्जुन ने उसे युद्ध करने के लिए रणभूमि में भेज दिया।

 



 

महाभारत युद्ध में एक बार जब पांडवों को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए मां काली को अपनी मर्जी से नर बलि देने की ज़रूरत पड़ी, तो कोई भी अपनी मर्जी से सामने नहीं आया। ऐसे में अरावन बलि देने के लिए तैयार हो गया, लेकिन उसने शर्त रखी कि वो कुंवारा नहीं मरना चाहता। हालांकि, समस्या यह थी कि एक दिन के लिए भला कौन अपनी बेटी की शादी अरावन से करता। ऐसे में श्रीकृष्ण ने मोहिनी का रूप धारण करके अरावन से शादी कर ली और अगले दिन अरावन ने अपनी बलि दे दी। अरावन के मरने के बाद श्रीकृष्ण उनके विधवा की तरह काफी समय तक रोते रहे।

 

 

दरअसल, कृष्ण ने पुरुष होते हुए भी स्त्री रूप में अरावन से विवाह किया था। इसी प्रथा की वजह से किन्नर अरावन को अपना आराध्य देव मानते हैं और तमिलनाडू के मंदिर में आज भी अरावन से किन्नर विवाह करते हैं।

किन्नरों और भगवान की शादी का उत्सव 18 दिनों तक चलता है। 16 दिनों तक तो खूब गीत और नाच होता है। 17वें दिन पूजा के बाद पंडित भगवान की ओर से किन्नरों को मंगलसूत्र देते हैं और फिर अंतिम दिन अरावन की मूर्ति को पूरे गांव में घुमाया जाता है, उसके बाद मूर्ति को तोड़ दिया जाता है और साथ ही दुल्हन बने किन्नर भी अपना मंगलसूत्र तोड़ देते हैं। सफेद कपड़े पहनकर विधवा की तरह विलाप करते हैं।


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