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आखिर क्यों बढ़ रही हैं रेल पटरियों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं?

Published on 10 February, 2017 at 5:03 pm By

हाल के दिनों में देश के अलग-अलग इलाकों में रेल पटरियों के क्षतिग्रस्त होने के मामले में बढ़ोत्तरी हुई है। मुंबई के नजदीक पिछले एक पखवाड़े में रेल पटरियों से छेड़छाड़ के चार मामले सामने आए हैं।

वहीं, कानपुर में हुए भीषण रेल हादसे की वजह भी क्षतिग्रस्त पटरियों को बताया गया था। इसके अलावा पिछले एक महीने में कई स्थानों पर रेल पटरियों को क्षतिग्रस्त किए जाने के मामले सामने आए हैं, जिनके बारे में समय रहते पता चल गया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

कानपुर रेल हादसा मामले में पाकिस्तानी खुफिया एजेन्सी आईएसआई के हाथ होने के सबूत मिले थे। इस मामले में आईएसआई एजेंट शमशुल हुदा को नेपाल से गिरफ्तार किया गया है।


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शमशुल और उसके साथियों ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने न केवल कानपुर हादसे की साजिश रची, बल्कि वे कुछ अन्य रेल हादसों को अंजाम देने की कोशिशों में भी थे। कानपुर के पुखरायां के नजदीक हुए 20 नवंबर को हुए रेल हादसे में 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। एक के बाद एक लगातार हो रही घटनाओं से यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह की घटनाओं की साजिश रची जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कई मामलों की राष्ट्रीय जांच एजेन्सी (एनआईए) से कराने की बात कही है।

साथ ही कहा गया है कि रेलवे पटरियों को नुकसान पहुंचाने की संदिग्ध कोशिशों की बढ़ती तादाद को देखते हुए पुलिस के अलावा आरपीएफ, जीआरपी क्राइम ब्रांच, एटीएस और आईबी की टीम भी जांच में शामिल होंगी।

रेल पटरियों को क्षतिग्रस्त करने का ताजा वाकया मुंबई के नजदीक हुआ है।



यहां के तजोला स्टेशन के नजदीक रेलवे कर्मचारियों को पटरियों के नजदीक विस्फोटक जिलेटिन की छड़ें मिलीं। इस रूट पर सुबह के वक्त 8 से 10 ट्रेनें प्रतिदिन गुजरती हैं। रेलवे कर्मचारियों ने जिलेटिन की इन छड़ों को पटरियों के पास बह रहे नाले में डाल दिया और इस बात की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी।

इसी तरह की एक घटना 1 जनवरी को कानपुर-कासगंज रेल रूट पर मंधना स्टेशन के नजदीक हुई थी।

यहां रेल ट्रैक को काटने की कोशिश की गई थी। 23 जनवरी को बिहार के समस्तीपुर में साठाजगत-दलसिंहसराय स्टेशन के बीच ट्रैक पर पत्थर का स्लैब रखा। वक्त रहते रेल कर्मचारियों को इस बात का पता चल गया और बड़ी दुर्घटना टल गई। वहीं, 26 जनवरी को कोडरमा-गिरिडीह रेल रूट पर फिश प्लेट खुलीं मिली थी। इसी तरह 30 जनवरी को उत्तर प्रदेश में गोरखपुर से गोंडा जा रही डेमो ट्रेन का इंजन पटरी पर पत्थर से टकराया। बाद में पत्थर रखने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया।

फरवरी महीने में 8 तारीख को पांच स्थानों पर रेल हादसे टल गए। इसी दिन महाराष्ट्र में पनवेल-उरण रूट पर जसई और दापोली स्टेशनों के बीच छह फुट लंबा लोहे का टुकड़ा मिला।


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जबकि महाराष्ट्र के ही अकोला जिले में पटरी पर भारी पत्थर रखा। इंटरसिटी एक्सप्रेस इस पत्थर से टकराई थी, लेकिन हादसा होने से बच गया। 8 फरवरी को ही बिहार के खगड़िया जिले में नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस क्षतिग्रस्त पटरियों से गुजरने वाली थी। वहीं, उत्तर प्रदेश के उरई -झांसी रूट के भुआ स्टेशन पर ट्रेन चटकी हुई पटरियों से गुजरी। बाद में परिचालन रोककर पटरियां दुरुस्त की गई। इस तरह की घटनाएं 6 और 9 फरवरी को भी देखने को मिलीं।

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