राखी बांधते समय बहन अपने भाई को क्यों लगाती हैं टीका और अक्षत, जानिए इसके मायने

6:45 pm 26 Aug, 2018

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आज देश भर के भाई-बहन पावन पर्व राखी मनाने में मशगूल हैं। भाइयों में उत्साह चरम पर है तो वहीं बहनों के लिए तो बहार का ही दिन है। प्रेम-स्नेह और एक-दूसरे की रक्षा के साथ ही खुशी की चाहत से सराबोर इस पर्व की रस्में भी बेहद खास होती हैं। बहनें भाइयों को टीका और अक्षत लगाकर राखी बांधती हैं और मंगल कामना करती हैं।

 

 

चावल अन्न का सबसे परिष्कृत रूप है और ये सुख-समृद्धि का परिचायक होता है। प्राचीन काल में धन-धान्य से परिपूर्णता की कामना देवताओं से भी की जाती थी। शास्त्रों में तो अन्न को लक्ष्मी और अन्नपूर्णा भगवती से जोड़ कर देखा जाता है। अक्षत और तिलक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। बताया जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा भी सकारात्मक रूप में बदल हो जाती है।

 

गौरतलब है कि माथे पर दोनों भौंह के मध्य में तिलक लगाने से शरीर में शक्ति का संचार होता है। भौंहों के मध्य स्थान को आज्ञा-चक्र कहा जाता है, लिहाजा ये आत्मविश्वास को बढ़ाता है।


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चावल (अक्षत) चंद्रमा से जुड़ा हुआ है और इसलिए इससे मन नियंत्रित रहता है। इतना ही नहीं, ये शुद्धता और स्वच्छता का भी प्रतीक होता है।

 

 

आयुर्वेद में तो ये भी बताया गया है कि कलाई पर राखी बांधने से स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिलते हैं। राखी से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मनोवैज्ञानिक लाभ भी पहुंचता है। रक्षाबंधन एक सामाजिक, पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का पर्व है और इसमें श्रावण मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है।

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