बिना एक पैसा खर्च किए भारत भ्रमण से लौटा युवक, जानिए फॉर्मूला!

Updated on 15 Jan, 2018 at 5:29 pm

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फिल्म ‘ये जवानी है दिवानी’ देखने के बाद ट्रिप पर निकलने की चाहत जाग जाती है, लेकिन अकेले कतई नहीं। अधिकतर समय यात्राओं की चाहत रहते हुए भी खर्च के बारे में सोचकर ट्रिप कैंसल करते हैं। अव्वल कहीं अगल-बगल में घूमकर मन को मना लेते हैं और गोवा, कुल्लू, मनाली, रानीखेत आदि जगहों को फिल्मों में देखकर लालची निगाह रखते हैं, फिर भूल जाते हैं।

इसके उलट इस युवा ने यात्रा पर निकलने की ठानी, वो भी बिना एक पैसा खर्च किए। हालांकि, यह एक ऐसा निर्णय था, जिसमें किसी भी खतरे को नाकारा नहीं जा सकता। लेकिन जैसे ही वह 9 महीने बाद 11 राज्यों का भ्रमण कर लौटा, लोग आश्चर्य में हैं!

23 वर्षीय विमल गीतानंदन की यात्रा बहुत ही दिलचस्प है!

गौरतलब है कि इस साहसी यात्रा से पहले विमल ऑफिस के अलावा कहीं बाहर अकेले नहीं गया था। वह अपने साथ एक टेंट, स्लीपिंग बैग, 3 जोड़ी कपड़े और एक लैपटॉप, एक फ़ोन और एक पावर बैंक लेकर जुलाई 2016 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर से भारत भ्रमण पर निकल पड़ा।

अपनी रोमांचक ट्रिप के बारे में विमल ने कहाः


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“मुझे लोगों पर पूरा भरोसा है और इसलिए मैंने इसे चैलेंज की तरह लिया कि बिना पैसे खर्च किए यात्रा पूरी करनी है। ये पता है कि बिना टिकट यात्रा करना गलत है, लेकिन मैंने इस यात्रा के दौरान ऐसा किया। मोटरसाईकल, कार, बस, ट्रक के ज़रिए 11 राज्यों की अपनी यात्रा पूरी की। अजनबियों ने मुझे इस यात्रा के दौरान बहुत मदद की।”

बता दें कि विमल ने 11 राज्यों- तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र, असम, मेघालय, नागालैंड और पश्चिम बंगाल की यात्रा की। इंजीनियरिंग ड्रॉप-आउट विमल के अनुसार, यात्रा के क्रम में वे अकेले होने पर रोये भी और रहस्य-रोमांच का अनुभव किया। विमल पहले अनंतपुर से बंगलुरू गए और पूरे दक्षिण भारत की यात्रा की। इसके बाद महाराष्ट्र होते हुए असम, मेघालय, नागालैंड तक की यात्रा की।

विमल को मानवता पर पूरा भरोसा है और यह उन्होंने इस यात्रा से साबित भी किया कि आज भी लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं। विमल का परिवार अनंतपुर से बेंगलुरु शिफ्ट हो रहा था, लिहाजा उन्हें इस यात्रा को बीच में ही विराम देना पड़ा।

विमल के पास अपनी इस यात्रा की पूरी कहानी है, जो अब वह बता रहे हैं। एक मुस्लिम ड्राइवर ने रोजा पर उनके लिए खाने का इंतजाम किया तो केरल के मुन्नार में एक परिवार के पास सोने के लिए सिर्फ़ एक खाट थी, जो उन्होंने विमल को दे दी। अब जब विमल घर लौट गए हैं, तो उन लोगों को घर बुला रहे हैं, जिन्होंने यात्रा के दौरान उनकी सहायता की थी।

अपनी इस यात्रा से लौटकर मिले अनुभवों के बाद विमल सेक्स वर्कर्स के लिए एक सामाजिक संगठन शुरू करना चाहते हैं। इसका ख्याल कोलकाता के सोनागाछी में सेक्स वर्कर्स की अवस्था देखने के बाद उनके जेहन में आया। वाकई विमल का कदम बेहद साहसिक था।

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