भारत में गांव की दशा बदल रही अमेरिकी महिला, बन रही है प्रेरणा

Updated on 18 Aug, 2017 at 3:54 pm

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सरकार भले ही लाख दावे कर ले, जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे, तब तक गांवों का विकास नहीं हो सकता। विकास को गांवों तक में सदियां लग जाएंगी। सरकार अपने स्तर पर काम रही है, लेकिन इसमें जन-सहभागिता बेहद जरूरी है। फिलहाल एक अमेरिकी महिला भारत के गांवों में विकास की बत्ती जला रही है। अमेरिका नागरिक मारटा संदेश दे रही है कि हाथ पर हाथ धरे रहने और सरकार को कोसने से दुःख दूर नहीं होने वाला, बल्कि खुद से भी प्रयास करना जरूरी है।

पेशे से लेखक मारटा वर्ष 2012 से हिन्दुस्तान में रह रही हैं ‘बेटर विलेज बेटर वर्ल्ड’ योजना पर काम कर रही है। द लॉजिकल इंडियन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का मकसद देश को शौचालय की समस्या से निजात दिलाने में मदद करना है।

भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत अब तक देशभर में लाखों टॉयलेट्स का निर्माण किया जा चुका है। मारटा का कहना है कि शौचालय इंसान का मूलभूत अधिकार है और ये सभी को मिलना चाहिए।


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करीब 4 साल पहले मारटा ने उत्तर प्रदेश के जगतपुर गांव में सर्वे किया और ग्रामीणों से उनकी राय जानी। तभी उन्हें पता चला कि शौचालय की जरुरत सबसे ज्यादा है। खासकर गांव की महिलाएं इस समस्या ज्यादा परेशान हैं। इसी को ध्यान में रखकर वे यूपी के कई गांवों में अब तक कुल 143 शौचालय का निर्माण करवा चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकताओं को देखते हुए 27 सोलर पैनल भी लगवाए, जिससे लोग अपने घरों में 2 बिजली के बल्व जला सकते हैं।

मारटा और उनकी टीम द्वारा बनाए गए इवैपोट्रांसपिरेशन टॉयलेट मॉडल का उद्देश्य लोगों को स्वच्छता का महत्व समझाना और जागरूक करना है। इस मॉडल के तहत घर और शौचालय का गंदा पानी सैनिटेशन सिस्टम के माध्यम से जमीन के अन्दर चला जाता है, जिससे आसपास गंदगी भी जमा नहीं होती। अमेरिका में इसी मॉडल का उपयोग किया जाता है।

मारटा और उनकी टीम ने शौचालय के अलावा ग्रामीण लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने का काम भी कर रही है, जो हमारे लिए प्रेरणाप्रद हैं। हम हिन्दुस्तानियों को इस अमेरिकी महिला से सीख लेकर देश और दुनिया की बेहतरी के लिए कुछ न कुछ प्रयास करना चाहिए।

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