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जानिए क्या है वास्तु शास्त्र, इसका महत्व और इतिहास

Updated on 25 March, 2019 at 10:52 am By

वास्तु शास्त्र आधुनिक युग में घर के निर्माण के समय बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। माना जाता है अगर वास्तु शास्त्र के अनुसार घर बनवाया जाए तो, ये दुख, दरिद्रता बीमारियां आदि से हमें दूर रखता है। वास्तु शास्त्र को बहुत से लोग टोना-टोटका या धार्मिक आस्था से जोड़ते हैं, लेकिन इसका किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या तंत्र-मंत्र से कोई लेना देना नहीं है।

हम जिस जगह या घर में रहते हैं उसे वास्तु कहते हैं। वास्तु में दिशाओं का महत्व होता है। किसी दिशा से आने वाली ऊर्जा आपको किस प्रकार से फ़ायदा पहुंचा सकती है, ये शास्त्र इसी पर निर्भर है। वास्तु शास्त्र हमें घर की दिशाओं और घर के भीतर की वस्तुओं के नकारात्म्क एवं सकारात्मक प्रभाव के बारे में बताता है।


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वास्तु शास्त्र का इतिहास

वास्तु शास्त्र भारतीय इतिहास में पहले से ही मौजूद है। लेकिन इस विद्या की ख़ोज करने पर इसके बारे में जानकारी मिली। इस पर ख़ोज तब शुरू हुई जब आर्यों का भारत में आगमन हुआ। इस बात का वर्णन ऋग्वेद में किया गया है कि हज़ारों वर्ष पहले भारत में खगोल व ज्योतिष शास्त्र की ओर अध्ययन किया गया था। आदिकाल से ही भारत के ऋषि-मुनियों ने सिद्धांत, निवेश एवं संहिता पर गंभीर अध्ययन किया था, जिसमें से ज्योतिष को विभिन्न भागों में बांटा गया, जिनमें से ही एक वास्तु शास्त्र भी है।

 

 

वास्तु शास्त्र का महत्व

वास्तु शास्त्र का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। वास्तु शास्त्र हमारे जीवन को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही कुछ गलत चीज़ों का प्रभाव हम पर पड़ने से हमें बचाता है। वास्तु शास्त्र हमें नकारात्मक ऊर्जाओं से दूर रखता है। ये सदियों पुराना निर्माण का विज्ञान है। इसमें वास्तुकला के सिद्धांत और दर्शन सम्मिलित हैं, जो किसी भी भवन निर्माण में महत्व रखते हैं। इनका प्रभाव मानव की जीवन शैली एवं रहन-सहन पर पड़ता है।


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पांच तत्वों से बना है वास्तु शास्त्र

वास्तु का अर्थ होता निवास स्थान, जहां हम रहते हैं। ये वास्तु शब्द धरती, जल, अग्नि, वायु, आकाश इन पांच तत्वों से मिलकर बना है। वास्तु शास्त्र की विद्या प्राचीनतम विद्याओं में से एक है। इसका सीधा संबंध दिशाओं और ऊर्जाओं से है। इसके अंतर्गत दिशाओं को आधार बनाकर आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जाओं को सकारात्मक किया जाता है, जिससे वो मानव जीवन पर अपना प्रतिकूल प्रभाव डाल सकें।

 

 

वास्तु का जीवन पर प्रभाव

वास्तु स्थापत्य वेद से जनित है। स्थापत्य वेद अथर्ववेद का अंग है। ये सीधा हमारे जीवन पर प्रभाव डालता है। जैसे सृष्टि का निर्माण पंचतत्व से हुआ है उसी तरह मानव शरीर का भी निर्माण पंचतत्व से हुआ है। ये ही पांचों तत्व हमारे जीवन को भी प्रभावित करते हैं। इसी तरह भवन निर्माण में भी भूखंड के आसपास की चीज़ों का महत्व होता है। इसी से पता चलता है भूखंड शुभ है या अशुभ है। घर किस दिशा में होना चाहिए, घर का दरवाज़ा किस दिशा में होना चाहिए, घर में रखी कौन सी वस्तु किस स्थान पर होनी चाहिए, ये सब वास्तु शास्त्र से ही पता चलता है। अगर किसी घर में वास्तु दोष पाया जाता है तो उसे सुधारने के लिए भी कई उपाय किए जाते हैं, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास हो।

 

 


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वास्तु शास्त्र एक ऐसा शास्त्र है, जिसकी वजह से हमारे ऊपर आने वाली विपदाओं से भी हमें छुटकारा मिल सकता है। इसलिए जब भी भवन निर्माण करना हो, दुकान खोलनी हो या इससे संबंधी कोई भी काम हो तो किसी वास्तुविद् से परामर्श ज़रूर लेना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा तो रहती ही है, साथ ही घर में बरकत बनी रहती है।

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