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पीयूष मिश्रा की जिन्दगी से जुड़ी 21 बातें, जिनके बारे में आपको शायद ही पता हो

Updated on 2 May, 2017 at 1:23 pm By

तेज, परिहासयुक्त व्यवहार और ईमानदारी- इन तीनों गुणों का एक साथ होना दुर्लभ है। पीयूष मिश्रा की कुछ ऐसी बातें हैं, जो हमें उनके काम और उनके व्यक्तित्व की ओर आकर्षित करती हैं। जब भी वे कुछ कहते हैं तो उनकी आंखों में न केवल दूरदृष्टि झलकती है, बल्कि उनमें राहत की चमक भी दिखाई देती है।

वह एकांत-प्रिय हैं। पक्के तौर पर ईमानदार हैं। आज हम आपको उनके बारे में उन 21 बातों का जिक्र करने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपको संभवतः नहीं पता होगा।

1. अपार प्रतिभा के धनी हैं पीयूष मिश्रा।


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वह एक गीतकार, संगीत निर्देशक, गायक, अभिनेता और पटकथा लेखक हैं। इतना ही नहीं, वह लंबे समय से थिएटर से जुड़े रहे हैं।

2. वह बचपन से ही बाग़ी प्रवृत्ति के थे। आज वह 51 वर्ष के हैं। उनका बचपन परेशानी में गुजरा था। उनके जवानी के दिन भी संघर्षों में ही बीते। इसके बावजूद उन्होंने अपने संघर्ष को कला और रचनात्मकता पर हावी नहीं होने दिया। आज वह एक मिसाल बन गए हैं।

3. उनकी परवरिश ग्वालियर में हुई। उन्हें बचपन में ही उनकी सबसे बड़ी बुआ ने गोद ले लिया था।

4. बेहद अनुशासनप्रिय माहौल में रहने की वजह से वह बागी हो गए थे।

उनकी शिक्षा-दीक्षा ‘कारमेल कान्वेंट स्कूल’ में हुई। वह कहते हैं कि उन्हें इसी स्कूल में पढ़ने के दौरान गायन, चित्रकारी और अभिनय करने का शौक शुरू हुआ।

5. उन्हें गुस्सा जल्दी आता है। वह यह भी मानते हैं कि उनके गुस्से की वजह से उनमें रचनात्मकता बाकी है।

6. उनका नाम पहले प्रियकांश शर्मा था, पर 10वीं कक्षा में उन्होंने एक शपथपत्र के द्वारा अपना नाम बदल कर पीयूष मिश्रा कर लिया ।

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7. कक्षा 8 में पढ़ने के दौरान उन्होंने अपनी पहली कविता लिखी थी।

“जिन्दा हो- हां तुम कोई शक नहीं, सांस लेते हुए देखा मैंने भी है। हाथ और पैरों और जिस्म को हरकतें खूब देते हुए देखा मैंने भी है। अब भले ही ये करते हुए होंठ तुम दर्द सहते हुए सख़्त सी लेते हो। अब हैं भी क्या कम तुम्हारे लिए, ख़ूब अपनी समझ में तो जी लेते हो।”

8. वह मुम्बई में वर्ष 2003 में आए थे। इससे पहले उन्होंने अपनी ज़िन्दगी के 20 साल एक शराबी थिएटर आर्टिस्ट के रूप में दिल्ली में गुज़ारे। यह उनके जीवन का रचनात्मक पर साथ ही, बर्बादी वाला दौर था। उनके 24 घंटे काम, शराब और महिला मित्रों की सोहबत में गुजरते थे।

9. उन्होंने एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा ) से स्नातक किया और “एक्ट वन” नामक थिएटर ग्रुप की शुरुआत की।

इसमें उनके साथ निर्देशक एन.के. शर्मा, मनोज बाजपेई, गजराज राव और आशीष विद्यार्थी भी थे।

10. स्नातक करने के बाद उन्हें “मैंने प्यार किया” फ़िल्म में मुख्य किरदार निभाने का प्रस्ताव मिला था।

पीयूष ने अपनी तरफ से इसके लिए कोई कोशिश नहीं की, इसलिए सूरज बड़जात्या ने सलमान ख़ान को इस फ़िल्म के लिए चुन लिया ।

11. वर्ष 1998 में आई मणिरत्नम की फ़िल्म “दिल से” के ज़रिए उन्होंने फ़िल्मी दुनिया में पदार्पण किया।

उन्होंने इसमें सीबीआई ऑफिसर का किरदार निभाया था।

12. टेलीविज़न पर वह वर्ष 1989 में ‘राजधानी’ नामक सीरियल के जरिए पहली बार दिखे।


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उन्होंने श्याम बेनेगल के “भारत एक खोज” कार्यक्रम में भी काम किया और वह एक डरावने टीवी सीरियल ‘किले का रहस्य’ में भी काम कर चुके हैं।

13. वह एक समय में चरित्रहीन और गुमराह व्यक्ति समझे जाते थे, पर आज वह एक आदर्श और घरेलू व्यक्ति बन चुके हैं।

एक बुरे दौर से गुजरने के बाद भी इंसान अपने आप को किस तरह सुधार सकता है, वह इसकी एक जीती-जागती मिसाल हैं।



अक्सर मीडिया में भी उन्हें नकारात्मक विशेषणों से संबोधित किया जाता था। पर वह सब अतीत की बातें हैं। उन्होंने अपने व्यक्तित्व को संवारने का हर-संभव प्रयास किया है। वर्ष 2010 में उन्होंने इगतपुरी में विपस्स्यना की प्रक्रिया में भी भाग लिया था।

14. “अरे रुक जा रे बंदे” नामी मशहूर गाना उन्होंने ही लिखा था।

‘ब्लैक फ्राइडे’ नामक फ़िल्म का यह गाना पूरे भारत में अब तक के सबसे मशहूर गानों में से है।

15. उन्होंने अनुराग कश्यप की फ़िल्म “गुलाल” में भी बेहतरीन संगीत दिया है। पर उनके पास संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं है।

इसका संगीत उन्होंने 8 दिनों में तैयार किया और इसके लिए उन्हें “संगीत निर्देशक द्वारा असाधारण प्रदर्शन” के तौर पर स्टारडस्ट अवार्ड भी मिला है।

16. गुलाल फ़िल्म के मशहूर गाने जैसे कि “ये शहर हमारा सोता है” और “यारा मौला” उन गानों में से हैं, जो उन्होंने थिएटर के दिनों में ऐसे ही बना डाले थे।

17. फ़िल्म “दि लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह” के डायलॉग उन्होंने ही लिखे थे। इसके लिए उन्हें “सर्वश्रेष्ठ डायलॉग” की श्रेणी में ज़ी सिने अवार्ड दिया गया था।

18. अनुराग कश्यप, तिग्मांशु धूलिया और साई कबीर जैसे फ़िल्मकारों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं।

वह कहते हैं कि मुझे अनुराग कश्यप की “बुरी लत” लग गई है ।

19. अगर आपने फिल्म रॉकस्टार देखी है, तो उसमें ढींगरा के किरदार को नहीं भूले होंगे, जो ये कहता रहता है कि “सब में शोहरत है….सब कुछ शोहरत है।”

20. फ़िल्म “झूम बराबर झूम” के सारे डायलॉग उन्होंने ख़ुद लिखे हैंं।

इनमें सबसे मशहूर ये डायलॉग था “सज गए लुटे हुए सजिन्दा जैसे बैठे हैं….और यार गए मगर हम बेशरम जिन्दा जैसे बैठे हैं”।

21. उन्होंने कोक स्टूडियो इंडिया का सबसे यादगार गाना ‘हुस्ना’ गाया था ।


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