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कारगिल युद्ध में हुआ था भीषण रक्तपात, जानिए इससे जुड़े 26 महत्वपूर्ण तथ्य

Updated on 10 July, 2016 at 1:18 pm By

नॉन न्युक्लियर अग्रेशन एग्रीमेन्ट (NNAA -1988), लाहौर घोषणा (1999) और विश्वास बहाली के विभिन्न उपायों (CBM) के बावजूद भारत और पाकिस्तान के बीच सरहद पर पिछले 5 दशकों में 3 युद्ध लड़े गए। लाहौर घोषणा के मद्देनजर भारत ने कभी सपने में भी कारगिल संघर्ष के बारे में नहीं सोचा था, जो दोनों पक्षों के लिए भारी रक्तपात का कारण बना।

कश्मीर को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध को हल करने की पहल तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सीमा पार से दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू करा कर की। पर आगे जो हुआ, उसने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आश्चर्य चकित कर दिया। दोनों देश परमाणु युद्ध के कगार पर खड़े थे। कारगिल युद्ध में जो जानें गई, उसने युद्ध के अमानवीय रूप को उजागर कर दिया।

1. बंटवारा


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शिमला समझौते के आधार पर हुए नियंत्रण रेखा के सीमांकन (LOC) के अनुसार कारगिल जम्मू-कश्मीर जिले में स्थित है। श्रीनगर से 205 किलोमीटर (127 मील) दूर।

2. जीत

भारतीय सेना अपने 11 लाख सक्रिय कर्मियों और 10 लाख सुरक्षित सैन्यकर्मियों के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। साहस और बलिदान की अपनी परम्परा को बनाए रखते हुए, बड़ी तादाद में सैनिकों ने दूसरे पक्ष के घुसपैठियों को 3 महीने लंबे समय तक चले ऑपरेशन के बाद नियंत्रण रेखा से बाहर खदेड़ दिया और कारगिल को फिर से सुरक्षित किया।

3. तनाव का था माहौल

कारगिल युद्ध के दौरान प्रतिकूल परिस्तिथियाँ काफी हद तक 1962 के भारत-चीन सीमा संघर्ष जैसी ही थी। मई 1998 में भारत और पाकिस्तान द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण के कारण 1999 की गर्मियों तक दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ चुका था।

4. शांति की उम्मीद


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1998 में बनी NDA सरकार की LOC पर फॉरवर्ड पॉलिसी से 1972 शिमला समझौते को बल मिला।

5. दुर्गम इलाका

NH 1D हाईवे कारगिल क्षेत्र से गुज़रते हुए लेह को श्रीनगर से जोड़ता है। हवाई मार्ग के अलावा, कारगिल क्षेत्र के लोगों और सैन्य कर्मियों के लिए इसे जीवनरेखा माना जाता है। NH 1D अत्यंत दुर्गम इलाका है, जहां सर्दियों में हिमस्खलन और भूस्खलन आम हैं।

6. जब दुश्मन देखे गए

3 मई 1999, को भारतीय सेना को कुछ स्थानीय चरवाहों ने कारगिल के पहाड़ी इलाकों में हलचल की सूचना दी। उन्होंने बताया कि कुछ हथियारबंद लोग वहां पोस्ट्स का निर्माण कर रहे हैं और मौजूदा बंकरों पर कब्ज़ा कर रहे हैं।

7. संयुक्त राष्ट्र में मामला

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे की शक्ल में पाक ने संयुक्त राष्ट्र में यह मसला उठाया। लेकिन उसका यह दांव भारतीय प्रतिरोध के कारण विफल हो गया। यह पाक की विदेश नीति की पूर्ण विफलता थी और भारत के लिए बड़ी जीत।

8. विश्वासघात

पाक सेना और तालिबान लड़ाकों ने भारतीय विमानों को पहाड़ी इलाको में गिराने के लिए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया। बटालिक सेक्टर में भारत के दो लड़ाकू विमान एमआई-17 और एमआई -8 के अलावा दो हेलीकाप्टर मिग -21 और मिग -27 भी मार गिराए गए। भारतीय वायु सेना के पायलट स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा को पाकिस्तानी सैनिकों ने सीधा सिर में गोली मार दी। अजय की मौत जिनेवा कन्वेंशन के तहत एक नृशंश हत्या की घटना थी।

9. कैप्टन सौरभ कालिया

मई 1999 के दूसरे सप्ताह में पाकिस्तान ने भारतीय शहीद कैप्टन सौरभ कालिया और गश्त पर गए अन्य 5 सैनिकों को बंदी बना लिया। कैप्टन कालिया और साथी सैनिकों के शरीर को बुरी तरह से क्षत-विक्षत और घायल कर भारत को सौंपा गया।

वहीं, दूसरी तरफ, भारतीय सेना ने शहीद और घायल पाक सैनिकों को इलाज और उचित ताबूत प्रदान किए और उन सब को वह गरिमा और सम्मान दिया, जिसके वे हकदार थे।

10. आपूर्ति लाइन को किया नष्ट

पाक सेना ने घुसपैठियों और अन्य आतंकवादी समूहों की सहायता से NH 1A (जो जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ता है; अब यह NH 44 के रूप में जाना जाता है) पर मई के शुरुआती दिनों में भारी बमबारी की, ताकि युद्ध के समय भारतीय सैनिकों को राशन और गोला बारूद की आपूर्ति न हो सके।

11. वैकल्पिक मार्ग

NH 1D के लावा, एक वैकल्पिक सड़क लेह (हिमाचल प्रदेश से होते हुए) को भारत से जोड़ती थी। NH 1D का मिलन 474 किलोमीटर लंबे मनाली लेह हाईवे से लेह में होता है। इस मार्ग का उपयोग भारतीय सेना ने काफिलों को स्थानांतरित करने के लिए किया, ताकि पाक बलों द्वारा NH 1A पर हो रही भारी गोलाबारी से बचा जा सके।

12. ऑपरेशन सफेद सागर

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के मिग-21 और मिराज 2000 को बड़े पैमाने पर ऑपरेशन सफेद सागर में इस्तेमाल किया गया।

13. वास्तविक युद्ध से पहले



524 भारतीय सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई के दौरान अपने जीवन का बलिदान दिया और 13,363 गंभीर रूप से घायल हुए। जबकि LOC के उस तरफ़ पाकिस्तान ने अपने 696 सैनिक और 40 नागरिक गंवाए ।

14. विशाल सेना को जुटाया

भारत ने 69 विमान सीमावर्ती इलाको में तैनात कर संघर्ष के क्षेत्र में अपना शक्ति प्रदर्शन किया। इसके अलावा, भारत ने 730,000 थल सैनिकों को लाकर अपनी स्थिति मजबूत की।

15. पहाड़ी मार्ग

ज़ोजिला दर्रा पहाड़ों के बीच से निकालकर कश्मीर क्षेत्र को कारगिल क्षेत्र से जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग है। युद्ध के दौरान इसका उपयोग किया गया।

16. उस समय भारतीय सेना प्रमुख वेद प्रकाश मलिक थे।

17. भारतीय नौसेना की ताकत

भारतीय नौसेना ने कारगिल युद्ध के दौरान कराची बंदरगाह की नाकाबंदी करने के लिए ऑपरेशन तलवार शुरू किया।

18. अंतिम स्टैंड

टाइगर हिल (प्वाइंट 5140) पर हुए अंतिम निर्णायक युद्ध में पांच भारतीय सैनिकों और 10 पाकिस्तानी सैनिकों की जान चली गई। कैप्टन विक्रम बत्रा ने भी एक घायल अधिकारी (कैप्टन नवीन) को प्वाइंट 4875 पर बचाते हुए अपना जीवन बलिदान दिया।

19. चलती रही बंदूकें

भारतीय सेना ने लगभग 250 बंदूकें और तोपें मंगवा कर थल सेना को समर्थन दिया। बोफोर्स FH-77B ने क्षेत्र में ऊंची पहाड़ियों पर विजयी होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जल्दी ही भारत ने कब्ज़ाई हुई ज़मीन वापस छुड़ा ली।

20. खड़ी ढलानों की चुनौती

18 डिग्री खड़ी ढलानों के चलते टाइगर हिल और तोलोलिंग पर चढाई कर पाना भारतीय सेना के लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो गया था।

21. कुछ भी असंभव नहीं

22 उच्च प्रशिक्षित सैनिकों ने 16,500 फ़ीट की ऊंचाई पर खड़ी चट्टान के माध्यम से टाइगर हिल का दरवाजा खटखटाया। द्रास-कारगिल सड़क पर नियंत्रण हासिल करना रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण था, ताकि घुसपैठिए टाइगर हिल से NH 1D पर गोलीबारी करने में अक्षम हो जाएं ।

22. जीत की पुष्टि

14 जुलाई को भारतीय प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन विजय’ को सफल घोषित किया। 26 जुलाई को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों के भारतीय LOC से पूरी तरह खदेड़ने की घोषणा की।

23. हिमाचल के लड़कों की जांबाजी

हिमाचल प्रदेश के 3 सैनिकों को परम वीर चक्र (2 मरणोपरांत और एक जीवित) से सम्मानित किया गया। ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव (जीवित) और 1/11 गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय (मरणोपरांत) को यह सम्मान मिला। लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय तो आज भी ‘ तोलोलिंग क्षेत्र ‘ में अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध है ।

24. यहीं मिली बरखा दत्त को लोकप्रियता

भारतीय पत्रकार बरखा दत्त ने पूरे कारगिल युद्ध को कवर किया और 17 JAK राइफल के शेर विक्रम बत्रा का एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू भी लिया। उन्हें उनकी सेवाओं के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने फिल्म ‘लक्ष्य’ में पत्रकार की भूमिका में उन्हें चित्रित किया है।

25. रूपहला पर्दा भी हुआ प्रेरित

कारगिल युद्ध उपरांत 2003 में ‘LOC: कारगिल’ तथा 2004 में ‘लक्ष्य’ के नाम से दो बॉलीवुड फिल्में बनी।

26. कारगिल ताबूत घोटाला

भाजपा सरकार के महंगे दरों पर ताबूत खरीदने के निर्णय की आलोचना हुई। CAG ने भी इस प्रक्रिया में अनियमितताओं की पुष्टि की।


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जय हिन्द

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